➤ हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, टीजीटी संस्कृत भर्ती पुराने नियमों से जारी रहेगी
➤ सरकार की बीएड अनिवार्यता अधिसूचना को दी गई न्यायिक चुनौती
➤ एनसीटीई और राज्य सरकार को नोटिस, चार हफ्ते में मांगा जवाब
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से टीजीटी संस्कृत (शास्त्री) की भर्ती प्रक्रिया में योग्यता संबंधी नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 19 फरवरी 2025 से पहले के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी।
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। अदालत ने यह आदेश संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में शास्त्री की योग्यता में बदलाव कर बीएड अनिवार्य कर दिया, जबकि वर्ष 2023 से पहले शास्त्री कर चुके अभ्यर्थियों को इससे अन्याय हुआ है। 19 फरवरी 2025 को सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन किया, जिसमें शास्त्री के लिए बीएड को अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि योग्यता मापदंड में बदलाव बिना किसी सर्च कमेटी की जांच के सीधे कर दिए गए, जो कानूनी प्रक्रिया के विरुद्ध हैं। इसके चलते ऐसे अभ्यर्थियों का हक मारा जा रहा है जिन्होंने पहले से मान्य शास्त्री की डिग्री प्राप्त कर ली थी।
हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील मामले पर प्राथमिक दृष्टि में संतुलन बनाए रखते हुए फिलहाल सरकार के नए नियमों पर अंतिम निर्णय आने तक रोक लगा दी है और स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया पुराने नियमों के अनुसार ही चलेगी।



