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राज्यपाल की टिप्पणी पर सीएम सुक्खू का तीखा पलटवार, नशे के खिलाफ कार्रवाई गिनाई


तिरंगे के अपमान पर भड़के सीएम, कहा- कांग्रेस सरकार नहीं करेगी बर्दाश्त
आपदा में बीजेपी नेताओं की निष्क्रियता पर तंज, बोले- 2023 में मदद मांगते तो बेहतर होता


हिमाचल प्रदेश में नशे के बढ़ते खतरे को लेकर बीते दिनों राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल द्वारा दिए गए बयान पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “हिमाचल प्रदेश में केवल एक नशा निवारण केंद्र” जैसी टिप्पणी संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नशे के खिलाफ ऐतिहासिक और निर्णायक कार्रवाई कर रही है। NDPS एक्ट में संशोधन कर, नशा कारोबारियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान किया गया है। अब तक ₹43 करोड़ की संपत्ति जब्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं राज्यपाल से मिलकर रिपोर्ट देंगे कि सरकार किस स्तर पर कार्रवाई कर रही है।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में पहली बार चार दिवसीय कैबिनेट बैठक हो रही है, जो महज औपचारिकता नहीं बल्कि “व्यवस्था परिवर्तन” और “आत्मनिर्भर हिमाचल” की दिशा में योजनाएं बनाने के उद्देश्य से है। इसमें विकास के मुद्दों पर गहन चर्चा की जाएगी।

सिराज में कॉलेज स्थानांतरण और भाजपा के विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनकी गाड़ी पर काले झंडे, जूते फेंके जबकि उस पर तिरंगा लगा था, यह सीधे-सीधे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। कांग्रेस सरकार ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कॉलेज को अस्थायी तौर पर स्थानांतरित किया गया है क्योंकि सिराज में सड़कों की हालत खराब है, जिससे छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।

सुक्खू ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर खुद अपनी विधानसभा में गाड़ी से नहीं पहुंच पाए, यही कारण है कि कॉलेज को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। उन्होंने कहा कि माता-पिता भी चाहते थे कि बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित वातावरण मिले।

भाजपा सांसदों के दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से मिलने पर सीएम ने कहा, “देर आए दुरुस्त आए”, लेकिन यह अच्छा होता यदि 2023 की आपदा के समय भाजपा नेता केंद्र से राहत मांगते। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जेपी नड्डा के नेतृत्व में भी केंद्र से सहयोग लेने को तैयार है बशर्ते केंद्र सरकार हिमाचल को विशेष राहत पैकेज और वन भूमि पर राहत देने की नीति अपनाए।