➤ हिमाचल निर्माता के गृह क्षेत्र की उपेक्षा पर उठे सवाल
➤ बागथन में खस्ताहाल सड़कें और बंद पड़े संस्थान बने जनसंकट
➤ सामाजिक कार्यकर्ता बोले – परमार के नाम पर वोट लिए, काम नहीं किया
हिमाचल निर्माता डॉ. वाई.एस. परमार के गृह क्षेत्र बागथन की लगातार उपेक्षा को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता नाथूराम चौहान ने सरकारों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चाहे वर्तमान सरकार हो या पूर्ववर्ती सरकारें, सभी ने इस क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज किया है। नाथूराम चौहान आज नाहन में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल निर्माता के गृह क्षेत्र बागथन की सड़कें इस समय जर्जर हालत में हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों और अन्य सरकारी दफ्तरों में भी कर्मचारियों की भारी कमी है। इसके चलते सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं।
नाथूराम चौहान ने कहा कि पशुपालन विभाग द्वारा खोला गया पशु प्रजनन केंद्र अब बदहाल हालत में है। वहीं बागवानी विभाग द्वारा बागवानों के लिए जो केंद्र स्थापित किया गया था, वह भी बंद पड़ा है, जिससे किसान और बागवानों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. वाई एस परमार का जन्मस्थल चन्हालग भी है, लेकिन यहां म्यूजियम बनाने की वर्षों पुरानी मांग अब तक पूरी नहीं हुई है।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि नेताओं ने सिर्फ परमार के नाम पर वोट बटोरे, लेकिन उनके गृह क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को सुधारने में कोई रुचि नहीं ली। नाथूराम चौहान ने मांग की कि अब इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जाए, ताकि हिमाचल निर्माता के क्षेत्र को उसकी गरिमा के अनुसार सम्मान और सुविधाएं मिल सकें।



