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SC ने हिमाचल समेत 4 राज्यों को नोटिस जारी किया

➤ SC ने हिमाचल समेत 4 राज्यों को नोटिस जारी किया
➤ बाढ़ और अवैध कटान पर गंभीर चिंता जताई गई
➤ राज्यों से तीन सप्ताह में जवाब तलब


सुप्रीम कोर्ट (SC) ने हिमाचल प्रदेश समेत पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ और आपदा जैसे हालात पर गुरुवार को कड़ी चिंता जताई। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई हुई है। अदालत ने इस ओर भी इशारा किया कि मीडिया रिपोर्ट्स और तस्वीरों में साफ दिखा कि किस तरह लकड़ियां बाढ़ के पानी में बहकर आईं। अदालत ने इस मामले को गंभीर विषय मानते हुए चारों राज्यों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

हिमाचल प्रदेश में विपक्ष और सरकार के अंदर से भी सवाल उठ रहे हैं। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सीधे तौर पर IFS अधिकारियों और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जंगल पूरी तरह गार्ड के भरोसे छोड़ दिए गए हैं और अधिकारी कभी जंगल तक नहीं जाते। उनका कहना है कि जिस तरह आपदा के दौरान बड़े पैमाने पर कटे हुए स्लीपर बहकर आए, यह जांच का विषय है।

इससे पहले कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर भी वन विभाग पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। मामला तब और गर्माया जब 24 जून को कुल्लू जिले में बादल फटने के बाद आई बाढ़ में सैकड़ों टन लकड़ियां पंडोह डैम तक पहुंच गईं। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर खूब तूल पकड़ा और लोगों ने इसे फिल्मी अंदाज में ‘पुष्पा स्टाइल अवैध कटान’ से जोड़कर वायरल कर दिया।

वन विभाग ने आनन-फानन में जांच बिठाई और खुद को क्लीन चिट दे दी। पीसीसीएफ संजय सूद का कहना है कि ये लकड़ियां फ्लैश फ्लड के कारण टूटकर डैम तक पहुंची थीं, इनमें किसी तरह की अवैध गतिविधि सामने नहीं आई। लेकिन सोशल मीडिया और जनता विभाग की इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुई और लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।

हकीकत यह है कि प्रदेश पिछले कुछ महीनों में प्राकृतिक आपदाओं से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अब तक लैंडस्लाइड की 127 घटनाएं, बाढ़ की 95 घटनाएं और बादल फटने की 45 घटनाएं हो चुकी हैं। इन घटनाओं में 50 लोगों की मौत, 43 लोग लापता और करीब 3690 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ है।

अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चारों राज्य सरकारें अदालत में क्या जवाब पेश करती हैं और क्या वन विभाग पर कार्रवाई होती है या नहीं।