➤ धर्मशाला में दो दिवसीय सामुदायिक रेडियो जागरूकता कार्यशाला सम्पन्न
➤ अर्चना कपूर ने कहा सामुदायिक रेडियो स्थानीय और समावेशी पहुंच का एकमात्र साधन
➤ प्रतिभागियों ने रेडियो को सशक्तिकरण और विकास का प्रभावी माध्यम बताया
धर्मशाला। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और सीकिंग मॉडर्न एप्लिकेशनस फाॅर रियल ट्रांसफरमेशन (स्मार्ट) के सहयोग से धर्मशाला स्थित धौलाधार हिल्स रिजॉर्ट में 17–18 सितंबर को दो दिवसीय सामुदायिक रेडियो जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला में सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और किसान विज्ञान केन्द्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य था प्रतिभागियों को समुदाय रेडियो की स्थापना व संचालन की तकनीकी व नियामक प्रक्रियाओं की जानकारी देना और इसे सशक्तिकरण, समावेशन और विकास के उपकरण के रूप में प्रस्तुत करना।
कार्यशाला का शुभारंभ स्मार्ट की संस्थापक निदेशक अर्चना कपूर ने स्वागत भाषण से किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक रेडियो ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो अपनी पहुँच में स्थानीय, सहभागी और समावेशी है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की निदेशक शिल्पा राव ने अपने संबोधन में महिला-नेतृत्व वाले संगठनों की भूमिका पर बल दिया और बताया कि उन्हें अतिरिक्त अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, मंत्रालय से अमित द्विवेदी और विनय दहिया ने नीतिगत दिशा-निर्देशों और कम्युनिटी रेडियो सपोर्ट स्कीम की जानकारी दी।
रेडियो गुंजन के निदेशक संदीप परमार ने कहा कि समुदाय रेडियो तभी प्रासंगिक है जब वह समुदाय से जुड़ा हो। कार्यशाला में रेडियो गुंजन, हमारा एमएसपीआईसीएम, रेडियो चितकारा, रेडियो अमलेला की आवाज़ और रेडियो नगर जैसे विभिन्न संचालित स्टेशनों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार रेडियो ने ग्रामीण समुदायों में जागरूकता, समस्या-समाधान और सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा दिया है।
प्रतिभागियों ने रेडियो गुंजन का दौरा भी किया, जहाँ बीईसीआईएल विशेषज्ञों ने तकनीकी उपकरणों की जानकारी दी। इसके अलावा “पावर वॉक” सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने अपने समुदायों की प्राथमिकताएँ तय कर कार्यक्रम डिज़ाइन करने का अभ्यास किया।
प्रतिभागियों ने इसे बेहद उपयोगी अनुभव बताते हुए कहा कि अब वे अपने क्षेत्रों में समुदाय रेडियो स्थापित करने हेतु प्रेरित हैं। उन्होंने माना कि यह केवल सूचना का साधन नहीं, बल्कि सशक्तिकरण, जवाबदेही, स्थानीय शासन की मजबूती और समावेशी विकास का परिवर्तनकारी मंच है।
प्रतिभागियों की राय:
एचएआरपी शिमला के गौरव बोस ने कहा – “अब मुझे समुदाय रेडियो की स्थापना की प्रक्रिया को लेकर पूर्ण स्पष्टता मिली है। वर्षों से जो संदेह थे, वे अब दूर हो गए हैं।”
शिखर चेतना संगठन (भिवानी, हरियाणा) के सुशील वर्मा ने कहा – “सोशल मीडिया के इस युग में भी दूरदराज़ क्षेत्रों के लिए समुदाय रेडियो आवश्यक है। यह आपदा के समय महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, अधिकारों व हकदारी पर जागरूकता फैलाता है और महिलाओं व वंचित वर्गों को आवाज़ देता है।”



