➤ जीएसटी दरों में कमी से हिमाचल में सीमेंट 30 से 40 रुपये तक सस्ता
➤ होटलों के कमरे, सेब पैकिंग सामग्री और कृषि उपकरणों के दामों में भी राहत
➤ नवरात्र से पहले गाड़ियों की बुकिंग में उछाल, हजारों ने कराई एडवांस बुकिंग
जीएसटी दरों में कमी का सीधा लाभ अब हिमाचल प्रदेश के उपभोक्ताओं को मिलने जा रहा है। लेकिन कुछ वस्तुएं महंगी भी हो रही हैं। प्रदेश में सीमेंट के दाम 30 से 40 रुपये प्रति बैग घट गए हैं। पहले से महंगे मिल रहे एसीसी, अल्ट्राटेक और बांगड़ जैसे ब्रांड अब उपभोक्ताओं को कम दाम पर उपलब्ध होंगे। बिलासुपर में एसीसी गोल्ड सीमेंट जो 480 रुपये प्रति बैग था, अब 440–445 रुपये में मिलेगा। इसी तरह एसीसी सुरक्षा सीमेंट 425 से घटकर 390–395 रुपये, बांगड़ सीमेंट 410 से 380 रुपये और अल्ट्राटेक 425 से घटकर 390 रुपये तक हो गया है।
जीएसटी में कटौती से केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि पर्यटन उद्योग को भी राहत मिलेगी। शिमला, मनाली समेत राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटल कमरों के किराए घटेंगे। पहले से आपदा से प्रभावित पर्यटन कारोबारियों को इससे बड़ी राहत की उम्मीद है।
सेब सीजन के बीच कार्टन और ट्रे के दाम भी 12% से घटकर 5% जीएसटी स्लैब में आ गए हैं। हालांकि, बागवान नेता हरीश चौहान का मानना है कि इससे महज एक फीसदी का ही फर्क पड़ेगा। फिलहाल यूनिवर्सल कार्टन के दाम 54 से 61 रुपये और प्रति ट्रे रेट 570 रुपये हैं।
कृषि उपकरणों के दाम भी कम होंगे, जिससे किसानों को फायदा मिलेगा। हालांकि, सरिया पहले से ही 18% जीएसटी में शामिल था, इसलिए उसके दामों में कोई बदलाव नहीं होगा।
दूसरी ओर, वाहनों की बुकिंग में भी तेजी देखी जा रही है। नवरात्र से पहले राज्यभर में 10 हजार से ज्यादा गाड़ियों की बुकिंग हो चुकी है। केवल शिमला में ही 400 से अधिक कारों और दोपहिया वाहनों की बुकिंग हुई है। तारादेवी स्थित गोयल मोटर्स में अकेले 250 गाड़ियों की एडवांस बुकिंग हुई है। कांगड़ा में 123 और सिरमौर में 150 से अधिक गाड़ियों की बुकिंग दर्ज हुई है।
इस तरह के वाहन होंगे महंगे
1,200 सीसी से ज्यादा और 4,000 मिमी से ज्यादा लंबी सभी गाड़ियों, 350 सीसी से ज्यादा क्षमता वाली मोटरसाइकिल और निजी उपयोग वाले विमानों एवं रेसिंग कारों पर 40 प्रतिशत कर लगेगा। अतिरिक्त चीनी वाले शीतल पेय पदार्थों पर 40 प्रतिशत कर लगेगा। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले की तरह पांच प्रतिशत कर लगता रहेगा।
तंबाकू, गुटखा, सिगरेट पर 28 फीसदी जीएसटी जारी रहेगा
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जीएसटी सुधारों से इसके कार्यान्वयन के दूसरे वर्ष तक अर्थव्यवस्था में 0.5 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि होने की संभावना है। इससे अमेरिकी शुल्क का पूरा प्रभाव बेअसर हो जाएगा। सीतारमण ने कहा कि राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई को लिए गए ऋणों का पूरा भुगतान होने तक तंबाकू, गुटखा, तंबाकू उत्पादों और सिगरेट पर वर्तमान 28 प्रतिशत कर और क्षतिपूर्ति उपकर लागू रहेगा। रेस क्लब, पट्टा या किराये की सेवाओं और कसीनो/ जुआ/ घुड़दौड़/ लॉटरी/ ऑनलाइन मनी गेमिंग पर भी 40 प्रतिशत कर लगाया जाएगा। माल ढुलाई के तृतीय-पक्ष बीमा की सेवा की आपूर्ति पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ अब 12 प्रतिशत के बजाय पांच प्रतिशत कर लगेगा।
क्या-क्या महंगा होगा?
तंबाकू, गुटखा, तंबाकू उत्पादों और सिगरेट
रेस क्लब, पट्टा या किराये की सेवाएं
कसीनो/ जुआ/ घुड़दौड़/ लॉटरी/ ऑनलाइन मनी गेमिंग
कोल्ड ड्रिंक, फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय उत्पाद महंगे
कैफीन-युक्त पेय पदार्थ, गैर-अल्कोहल पेय पदार्थ
अतिरिक्त चीनी या अन्य मीठा पदार्थ या स्वाद वाले उत्पाद
कोल्ड ड्रिंक, फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय उत्पाद महंगे
कोका-कोला एवं पेप्सी जैसे लोकप्रिय शीतल पेय और अन्य गैर-अल्कोहल पेय पदार्थ भी अब महंगे हो जाएंगे। जीएसटी परिषद ने बुधवार को कार्बोनेटेड पेय पदार्थों पर कर की दर को वर्तमान 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने को मंजूरी दे दी। जीएसटी परिषद ने फलों से बने पेय या फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय पदार्थों पर भी कर की दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी। इसके साथ ही परिषद ने कैफीन-युक्त पेय पदार्थों पर भी जीएसटी की दर बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी। अन्य गैर-अल्कोहल पेय पदार्थ भी महंगे हो जाएंगे क्योंकि इन वस्तुओं पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है।
मीठे स्वाद वाले उत्पाद भी महंगे हुए
जीएसटी परिषद ने अतिरिक्त चीनी या अन्य मीठा पदार्थ या स्वाद वाले सभी उत्पादों पर भी कर की दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी है। हालांकि फलों के गूदे या फलों के रस आधारित पेय (फलों के कार्बोनेटेड पेय या फलों के रस वाले कार्बोनेटेड पेय को छोड़कर) पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई है।



