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हिमाचल में 28 सरकारी स्कूलों का दर्जा घटा, पढ़ें पूरी सूची


हिमाचल सरकार ने 28 सरकारी स्कूलों का दर्जा घटाया, विद्यार्थियों की संख्या रही पांच या कम
12 वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल अब हाईस्कूल और 16 हाईस्कूल अब मिडिल स्कूल बने
छात्रों को नजदीकी या पसंदीदा स्कूलों में किया जाएगा ट्रांसफर, स्टाफ के तबादले के निर्देश बाद में



हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए राज्य के 28 सरकारी स्कूलों का दर्जा घटाने का फैसला लिया है। यह निर्णय उन स्कूलों को लेकर लिया गया है जिनमें 18 सितंबर 2025 तक विद्यार्थियों की संख्या पांच या उससे कम रही।

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से बुधवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, दर्जा घटाए गए स्कूलों में 12 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (GSSS) और 16 सरकारी उच्च विद्यालय (GHS) शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों, अभिलेखों, स्टॉक मदों, भवनों और भूमि के हस्तांतरण से जुड़ी विस्तृत दिशानिर्देश बाद में जारी किए जाएंगे।

सरकार ने यह भी तय किया है कि इन स्कूलों में नामांकित विद्यार्थियों को निकटवर्ती विद्यालयों या उनकी पसंद के विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।


इन वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों का दर्जा घटाकर हाईस्कूल किया गया है:

  1. भौंरा (कांगड़ा)

  2. चंबी (मंडी)

  3. कोटगढ़ (शिमला)

  4. जुब्बड़ (शिमला)

  5. दमयाना (शिमला)

  6. बोसारी (शिमला)

  7. रत्नाड़ी (शिमला)

  8. बरवास (सिरमौर)

  9. कडीवान (शिमला)

  10. झीना (शिमला)

  11. बराच (शिमला)

  12. बाघल (शिमला)


इन हाई स्कूलों का दर्जा घटाकर मिडिल स्कूल किया गया है:

  1. घरना (कांगड़ा)

  2. त्रास्वान (मंडी)

  3. मलहोटी (सिरमौर)

  4. लिंगजार (शिमला)

  5. चनोग (शिमला)

  6. मुनीष (शिमला)

  7. ब्राल (शिमला)

  8. अलावांग (शिमला)

  9. कुहल (शिमला)

  10. कांडा (शिमला)

  11. जराशी (शिमला)

  12. जनाहन (शिमला)

  13. गैहा (शिमला)

  14. कचेरी (शिमला)

  15. नागान (शिमला)

  16. गाहन (शिमला)


शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने यह निर्णय संसाधनों के बेहतर उपयोग और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से लिया है। विभाग के अनुसार, कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों को बनाए रखने से शिक्षक संसाधन और बजट दोनों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

राज्य सरकार अब उन स्कूलों पर ध्यान केंद्रित करेगी जहां छात्र संख्या अधिक है और जिन्हें अतिरिक्त सुविधाओं व स्टाफ की आवश्यकता है। अधिकारियों ने कहा कि दर्जा घटाना किसी सजा के रूप में नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था के संवर्धन और पुनर्संतुलन की दिशा में कदम है।