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अनुराग सिंह ठाकुर ने जिनेवा में 151वीं आईपीयू सभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया
➤ भारत ने कहा – हम मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध हैं
➤ ठाकुर ने वैश्विक सहयोग और बहुपक्षीय सुधारों का आह्वान किया



पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने जिनेवा में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 151वीं सभा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि भारत मानवीय मूल्यों पर आधारित वैश्विक एकजुटता का पक्षधर है।

उन्होंने “संकट के समय में मानवीय मानदंडों का पालन और मानवीय कार्यों का समर्थन” विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत की मानवीय भागीदारी संप्रभुता, अहस्तक्षेप और नैतिक जिम्मेदारी से प्रेरित है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत मानवता, तटस्थता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता जैसे चार मूल मानवीय सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह समर्पित है।

ठाकुर ने 170 से अधिक देशों के सांसदों से कहा कि वे भू-राजनीतिक विभाजनों से ऊपर उठकर मानव गरिमा और कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए एकजुट हों। उन्होंने चेतावनी दी कि आज दुनिया में संघर्षों और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ोतरी के कारण अंतरराष्ट्रीय मानवीय ढांचे पर भारी दबाव है, साथ ही बहुपक्षीय सहयोग में गिरावट और मानवीय फंडिंग की कमी भी गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

उन्होंने जोर दिया कि बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की अब सख्त जरूरत है ताकि वे अधिक समावेशी और वैश्विक दक्षिण (Global South) के हितों का बेहतर प्रतिनिधित्व कर सकें। ठाकुर ने संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता प्रणाली को मजबूत करने के लिए सरकारों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और निजी क्षेत्र से सहयोग बढ़ाने की अपील की।

अपने संबोधन में ठाकुर ने भारत के ऐतिहासिक योगदान की याद दिलाई। उन्होंने बताया कि भारत ने अब तक 49 संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में दो लाख से अधिक कर्मियों को भेजा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के “वैक्सीन मैत्री” अभियान के तहत 100 से अधिक देशों को 301 मिलियन डोज दी गईं, जिससे भारत की वैश्विक मानवता के प्रति प्रतिबद्धता झलकती है।

उन्होंने हाल के मानवीय अभियानों जैसे ऑपरेशन ब्रह्मा (म्यांमार, 2025) और ऑपरेशन सद्भाव (पश्चिम एशिया) का भी उल्लेख किया, जिनसे संकट के समय भारत की त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीकी क्षमता का पता चलता है।

घरेलू स्तर पर, ठाकुर ने आपदा प्रबंधन अधिनियम (2005) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 16,000 से अधिक प्रशिक्षित कर्मियों वाला NDRF अब तक 1.59 लाख लोगों की जान बचा चुका है और 8.6 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

ठाकुर ने कहा कि भारत ने राष्ट्रीय और राज्य आपदा कोष, CSR योगदान और नागरिक समाज के सहयोग से एक मजबूत वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा ढांचा बनाया है।

उन्होंने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा —

“भारत की भागीदारी केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारी सभ्यतागत दृष्टि और वैश्विक एकजुटता के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता है। हम ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के सिद्धांत पर चलते हैं।”