➤ हमीरपुर में महिला पर कातिलाना हमला करने वाले आरोपी को नाबालिग बताते हुए भेजा गया संप्रेषण गृह
➤ छह दिन मौत से जूझने के बाद पीड़िता ने पीजीआई चंडीगढ़ में तोड़ा दम, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
➤ दिव्यांग बेटे गोलू की देखभाल को लेकर समाज में उठे सवाल, न्याय और सख्त सजा की मांग तेज
हमीरपुर। जिला हमीरपुर में घटित एक भयावह और पीड़ादायक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। 3 नवंबर, सोमवार को एक महिला पर दरिंदे ने निर्मम हमला कर दिया था। गंभीर रूप से घायल महिला को स्थानीय अस्पताल से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहाँ छह दिन मौत से जूझने के बाद उसने दम तोड़ दिया। यह घटना न केवल शर्मनाक है बल्कि समाज और व्यवस्था दोनों के लिए सवाल खड़े करती है।
महिला की मौत ने पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बना दिया है। आरोपी को नाबालिग बताते हुए संप्रेषण गृह भेजा गया, लेकिन जनता में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या इतनी क्रूरता करने वाले को सिर्फ नाबालिग कहकर संरक्षण देना उचित है? लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में नाबालिग की परिभाषा का पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई इस तरह की जघन्य घटना करने की हिम्मत न जुटा सके।
मृतका का परिवार अब असहनीय पीड़ा से गुजर रहा है। सबसे बड़ा दुख यह है कि महिला अपने पीछे एक दिव्यांग बेटे गोलू को छोड़ गई है, जिसकी दुनिया अब पूरी तरह बदल चुकी है। गोलू की मां ही उसका एकमात्र सहारा थी, और अब उसके भविष्य को लेकर हर संवेदनशील व्यक्ति चिंतित है।
यह केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज का दर्द है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि हमें अपने बच्चों के व्यवहार, संगति और मानसिक स्थिति पर ध्यान देना होगा, ताकि भविष्य में कोई और गोलू अपनी मां को इस तरह न खोए।
एसपी हमीरपुर भगत सिंह ठाकुर ने बताया कि 3 नवंबर को महिला पर हमला हुआ था और शुक्रवार को उसने पीजीआई चंडीगढ़ में दम तोड़ दिया। आज पीड़िता का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में किया जाएगा।



