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हाईकोर्ट से ग्राम रोजगार सेवकों को राहत: सरकार की नई अनुबंध अधिसूचना पर लगी रोक

➤ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 8 सितंबर की नई अनुबंध अधिसूचना पर लगाई रोक
➤ राहत केवल याचिकाकर्ता ग्राम रोजगार सेवकों को, राज्यभर में संख्या करीब 1081
➤ सरकार ने जवाब के लिए चार सप्ताह मांगा, अगली सुनवाई 16 दिसंबर को


शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सेवकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की एकल पीठ ने राज्य सरकार द्वारा जारी नए अनुबंध आदेश (8 सितंबर 2025) पर अंतरिम रोक लगा दी है।
कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और निदेशक ग्रामीण विकास विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह राहत केवल उन ग्राम रोजगार सेवकों को दी गई है, जो इस मामले में याचिकाकर्ता हैं। प्रदेश भर में ऐसे कर्मचारियों की संख्या लगभग 1081 बताई जा रही है।

राज्य सरकार ने अदालत से चार सप्ताह का समय जवाब दाखिल करने के लिए मांगा है।मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2025 को निर्धारित की गई है। इससे पहले करीब 600 ग्राम रोजगार सेवकों ने सरकार की नई नीति के खिलाफ संयुक्त याचिका दाखिल की थी।
यह आदेश “शिवराज और अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार” मामले में पारित किया गया है।

सरकार की 8 सितंबर की अधिसूचना में कहा गया था कि सभी ग्राम रोजगार सेवकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और तकनीकी सहायकों को नया स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट साइन करना होगा। लेकिन कर्मचारी लंबे समय से सेवाओं के नियमितीकरण, समय पर वेतन और स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। वे लगातार अस्थायी अनुबंध व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे वर्ष 2008 से पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं और तकनीकी कार्यों का संचालन कर रहे हैं। वर्ष 2018 से उन्हें फुल स्केल सैलरी दी जा रही है,
इसलिए अब सरकार को नियमित नियुक्ति की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।