➤ किन्नौर जिले ने पहली बार एशियन वाटरबर्ड सेंसस (AWC) 2026 में भाग लिया
➤ कूपा डैम, सांगला वैली में 56 पक्षी प्रजातियां दर्ज, कुल संख्या 183
➤ जलपक्षी संरक्षण और आर्द्रभूमि पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले ने पहली बार एशियन वाटरबर्ड सेंसस (AWC) 2026 में सहभागिता दर्ज कराते हुए पक्षी संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। सांगला वैली स्थित कूपा डैम और बसपा नदी क्षेत्र में आयोजित इस पक्षी गणना अभियान के दौरान 56 विभिन्न पक्षी प्रजातियों को रिकॉर्ड किया गया, जिनकी कुल संख्या 183 आंकी गई।
इस गणना में 18 जलपक्षी (वाटर बर्ड्स) और 38 स्थलीय पक्षी (टेरिस्ट्रियल बर्ड्स) शामिल हैं। सर्वेक्षण के दौरान Ibisbill, Mallard, Great Cormorant, Common Pochard, Garganey, Green-winged Teal, Common Coot, Northern Shoveler, Black-winged Stilt, Sandpipers, Forktails, Wagtails, Redstarts और Brown Dipper सहित कई महत्वपूर्ण प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई।
एशियन वाटरबर्ड सेंसस की शुरुआत 1987 में भारतीय उपमहाद्वीप में हुई थी। आज यह कार्यक्रम अफगानिस्तान से जापान, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया तक फैले ईस्ट एशियन–ऑस्ट्रेलियन फ्लाईवे और सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के बड़े हिस्से को कवर करता है। यह वेटलैंड्स इंटरनेशनल द्वारा समन्वित वैश्विक जलपक्षी निगरानी कार्यक्रम का अहम हिस्सा है।
किन्नौर में यह नागरिक विज्ञान पहल वन्यप्राणी मंडल सराहन, वन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। अभियान में 15 प्रतिभागियों की टीम को तीन समूहों में विभाजित कर कूपा डैम, बसपा नदी, कृत्रिम झीलों और आसपास के संरक्षित वनों सहित पांच स्थलों पर सर्वेक्षण किया गया।
सर्वेक्षण के दौरान पक्षियों की संख्या, व्यवहार और गतिविधियों का दस्तावेजीकरण पूर्व-निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत किया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की आबादी का आकलन, आर्द्रभूमियों की पहचान और भविष्य में संरक्षण उपायों को मजबूत करना है।
जिला प्रशासन की ओर से डीसी किन्नौर अमित कुमार और वन्यप्राणी मंडल सराहन के अशोक कुमार नेगी ने सर्वेक्षण टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अध्ययनों से जैवविविधता वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों की पहचान होती है और संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाया जा सकता है।
इबर्ड रीजनल कोऑर्डिनेटर संतोष कुमार ठाकुर ने बताया कि यह सर्वेक्षण 4 जनवरी से 17 जनवरी तक पूरे हिमाचल प्रदेश में चलेगा। इसके तहत प्रदेश के सभी प्रमुख पक्षी हॉटस्पॉट और वेटलैंड्स को कवर किया जाएगा। किन्नौर का कूपा डैम–बसपा नदी क्षेत्र इस बार इबर्ड प्लेटफॉर्म पर आधिकारिक बर्ड हॉटस्पॉट के रूप में दर्ज किया गया है, जिससे भविष्य में यहां की जैवविविधता संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।



