➤ महिलाओं युवाओं और बुजुर्गों के सशक्तिकरण पर केंद्रित बजट 2026
➤ शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और हाईस्पीड कनेक्टिविटी पर बड़ा निवेश
➤ SHE-Mart लखपति दीदी AI स्किल लैब्स और गर्ल्स हॉस्टल जैसी ठोस घोषणाएं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट 2026 पेश करते हुए इसे समाज के तीन स्तंभों महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों को केंद्र में रखकर तैयार किया गया दस्तावेज बताया। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह दूसरा पूर्ण बजट और वित्त मंत्री के रूप में उनका नौवां बजट है। बजट का स्वरूप चुनावी कम और दीर्घकालिक तैयारी पर अधिक केंद्रित नजर आया, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, डिजिटल सशक्तिकरण और कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से SHE-Mart प्लेटफॉर्म स्थापित करने की घोषणा की गई, जिससे महिला उद्यमियों को बाजार और डिजिटल बिक्री की सुविधा मिलेगी। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और MSME क्षेत्र में कार्यरत महिला उद्यमियों के लिए ऋण प्रक्रिया आसान की जाएगी। शहरों में वर्किंग वुमन हॉस्टल और क्रेच सुविधाओं का विस्तार तथा हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल खोलने की योजना से छात्राओं और कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा। ग्रामीण महिलाओं की आय स्थायी बनाने के लिए लखपति दीदी योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा। मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और केयर सेक्टर में विशेष स्किल प्रोग्राम चलाए जाएंगे।
युवाओं के लिए इस बजट को “युवा शक्ति से प्रेरित” बताया गया। AI, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। देश में तीन नए फार्मास्युटिकल संस्थान, तीन आयुर्वेद कॉलेज, औद्योगिक गलियारों के पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी की स्थापना की जाएगी। IIT मुंबई की मदद से 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित होंगी, जिससे एनीमेशन, गेमिंग और विजुअल इफेक्ट्स में करियर के अवसर बढ़ेंगे। पेड अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप के अवसरों का विस्तार होगा तथा गिग और फ्रीलांस युवाओं को सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाया जाएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की 24 दवाओं पर आयात शुल्क हटाया गया है, जिससे इलाज सस्ता होने की उम्मीद है। 3 आयुर्वेदिक AIIMS और 5 मेडिकल टूरिज्म हब स्थापित किए जाएंगे। रेल और कनेक्टिविटी के तहत 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास पर 12.2 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे।
टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं किया गया, लेकिन रिवाइज्ड रिटर्न की अंतिम तिथि 31 मार्च कर दी गई है। सरकार ने राजकोषीय घाटा 4.3% तक लाने और 2030-31 तक कर्ज को GDP के 50% के करीब रखने का लक्ष्य रखा है। कुल मिलाकर बजट 2026 में तत्काल राहत से ज्यादा भविष्य की संरचना और मानव संसाधन विकास पर जोर स्पष्ट दिखाई देता है।
बजट की 8 सबसे बड़ी घोषणाएं
i. इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं, लेकिन रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई।
ii. कैंसर की 17 दवाओं और 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाइयों पर आयात शुल्क हटाया गया।
iii. डिफेंस बजट में 15.2% की बढ़ोतरी, आधुनिकीकरण पर 22% ज्यादा खर्च।
iv. 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा।
v. 3 आयुर्वेदिक AIIMS और 5 मेडिकल टूरिज्म हब बनाए जाएंगे।
vi. टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास के लिए ₹12.2 लाख करोड़ खर्च होंगे।
vii. 15 हजार स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स बनेंगी।
viii. देश के करीब 800 जिलों में लड़कियों के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे।
सेक्टर वाइज बजट की तस्वीर
इनकम टैक्स
सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि न्यू इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। रिटर्न फाइलिंग के फॉर्म को सरल बनाया गया है ताकि आम लोग आसानी से भर सकें।
स्वास्थ्य
कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की महंगी दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटने से इलाज सस्ता होने की उम्मीद है। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 5 रीजनल हब बनाए जाएंगे।
आयुर्वेद
भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी है। 3 आयुर्वेदिक एम्स, नेशनल टेस्टिंग लैब्स और अगले 5 साल में एक लाख हेल्थकेयर प्रोफेशनल तैयार करने की योजना है।
रेल और कनेक्टिविटी
मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी समेत 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनेंगे। जलमार्गों और ग्रीन ट्रांसपोर्ट पर भी जोर है।
महिलाएं और शिक्षा
लखपति दीदी मॉडल के तहत SHE-मार्ट बनाए जाएंगे। STEM एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा और हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
घाटा, कर्ज और सरकार का गणित
सरकार ने राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% तक लाने का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल 4.4% था। 2030-31 तक कुल सरकारी कर्ज को GDP के करीब 50% पर लाने की योजना है। 2026-27 में सरकार ₹11.7 लाख करोड़ का कर्ज बाजार से लेगी।
कुल मिलाकर यह बजट चुनावी नहीं, बल्कि रणनीतिक और सेक्टर आधारित नजर आता है, जिसमें आम आदमी को सीधी राहत कम और भविष्य की तैयारी ज्यादा दिखाई देती है।



