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भाजपा ने सर्वदलीय बैठक का किया बहिष्‍कार, सुक्‍खू सरकार पर लगाए ये आरोप


डॉ. राजीव बिंदल ने कहा, केंद्र को बदनाम कर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कांग्रेस
RDG पर वित्त आयोग की सिफारिशों का हवाला, ठोस आंकड़े रखे
आपत्तिजनक भाषा के विरोध में भाजपा ने सर्वदलीय बैठक छोड़ी


प्रदेश की वित्तीय स्थिति और राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने के मुद्दे पर शिमला के पीटरहॉफ में आयोजित सर्वदलीय बैठक में सियासी तापमान बढ़ गया। बैठक में भाजपा ने जहां केंद्र से मिली आर्थिक सहायता के विस्तृत आंकड़े रखे, वहीं आपत्तिजनक भाषा के विरोध में प्रतिनिधिमंडल ने बीच बैठक से बाहर निकलकर कड़ा संदेश दिया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि प्रदेश हित सर्वोपरि है और किसी भी परिस्थिति में केंद्र सरकार को बदनाम कर अपनी प्रशासनिक विफलताओं से बचने की कोशिश उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार को सत्ता में आए लगभग 40 महीने हो चुके हैं और पूर्ण बहुमत के बावजूद वित्तीय प्रबंधन की खामियों का ठीकरा केंद्र पर फोड़ना एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान का चरणबद्ध समाप्त होना 14वें और 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों में पहले से उल्लेखित था। यह कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं था। ऐसे में इसे नई आपदा की तरह प्रस्तुत करना जनता को भ्रमित करने जैसा है। सरकार को समय रहते वैकल्पिक संसाधन जुटाने, व्यय नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए थे।

बैठक में भाजपा ने केंद्र से प्राप्त सहायता के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्ष 2022-23 में लगभग 50 हजार करोड़, 2023-24 में लगभग 43 हजार करोड़ और 2024-25/2025-26 में 35 हजार करोड़ से अधिक राशि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं, टैक्स डिवोल्यूशन, केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं, विश्व बैंक, नाबार्ड और पीएमजीएसवाई के माध्यम से प्रदेश को मिली है।

नेशनल हाईवे परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए बिंदल ने कहा कि प्रदेश में करीब 44 हजार करोड़ से अधिक लागत की परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। रेलवे विस्तार, सुरंग, फोरलेन और ऑल वेदर कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाओं ने हिमाचल के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दी है। औद्योगिक विकास के संदर्भ में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के औद्योगिक पैकेज का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल के उद्योगों की मजबूत नींव उसी दौर में रखी गई थी।

भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक के दौरान कुछ वक्ताओं ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के संदर्भ में अनुचित शब्दों का प्रयोग किया। पार्टी ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा और संस्थाओं के सम्मान से समझौता स्वीकार्य नहीं है। इसी विरोध के चलते भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने बैठक बीच में ही छोड़ दी।

पार्टी ने दोहराया कि वह प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए हर रचनात्मक संवाद में भाग लेने को तैयार है, लेकिन एकतरफा दोषारोपण और भ्रामक प्रस्तुति से समाधान नहीं निकलेगा। भाजपा ने कहा कि प्रदेश हित के हर मुद्दे पर वह तथ्यात्मक और मजबूत पक्ष रखती रहेगी।