➤ शिमला नगर निगम ने पेश किया 688.02 करोड़ का रिकॉर्ड बजट
➤ अप्रैल से प्रॉपर्टी टैक्स, कूड़ा शुल्क और पानी दरों में बढ़ोतरी
➤ 32,507 भवनमालिकों पर बढ़ेगा बोझ, निगम को 10 करोड़ की ग्रांट मिलने की उम्मीद
कांग्रेस शासित शिमला नगर निगम ने शुक्रवार को अपने इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा 688.02 करोड़ रुपये का बजट पेश कर दिया। महापौर सुरेंद्र चौहान ने सदन में दो घंटे 17 मिनट तक खड़े होकर 66 पेज का बजट भाषण पढ़ा और दावा किया कि इस बार की गई घोषणाएं धरातल पर उतरेंगी। बजट में शहर के विकास, आधुनिक ढांचे और आय के नए स्रोतों का खाका तो पेश किया गया, लेकिन साथ ही शहरवासियों पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ भी डाल दिया गया है।
सबसे अहम घोषणा अप्रैल से प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी की रही। महापौर ने कहा कि केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राज्य की सकल घरेलू उत्पाद दर के अनुसार संपत्ति कर बढ़ाना अनिवार्य है, तभी केंद्र से अनुदान प्राप्त होगा। अनुमान है कि इस बार छह से आठ फीसदी तक टैक्स बढ़ सकता है। पिछले साल करीब सात फीसदी बढ़ोतरी हुई थी। इस फैसले से शहर के 32,507 भवनमालिक प्रभावित होंगे।
केवल प्रॉपर्टी टैक्स ही नहीं, बल्कि अप्रैल से कूड़ा शुल्क में दस फीसदी और पानी की दरों में आठ फीसदी बढ़ोतरी भी लागू होगी। शहरवासी इस बार राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन बजट में वार्षिक बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रखा गया है। हालांकि निगम का दावा है कि टैक्स वसूली का लक्ष्य पूरा होने पर इस वर्ष केंद्र से करीब 10 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलना तय है।
निगम ने टैक्स चोरी पर भी सख्ती दिखाई है। इस साल करीब चार करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा गया है। 30 वार्डों में सर्वे पूरा हो चुका है और चार वार्डों में सर्वे जारी है। सर्वे के बाद स्पष्ट होगा कि कितने भवनमालिक टैक्स चोरी कर रहे हैं।
आय बढ़ाने के लिए मालरोड पर बन रहा डक्ट भी कमाई का जरिया बनेगा। डक्ट से गुजरने वाली पाइपलाइन, केबल और बिजली तारों के लिए संबंधित विभागों से किराया वसूला जाएगा। इसकी दरें तय की जा रही हैं।
बजट आकार में इस बार ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है। वर्ष 2025 में बजट 188 करोड़ रुपये था, 2024 में 247 करोड़, 2023 में 180 करोड़ और 2022 में 224 करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2017 में 401 करोड़ का बजट पेश किया गया था, लेकिन इस बार 688.02 करोड़ का आंकड़ा पार कर नया रिकॉर्ड बना दिया गया है।
बजट में सब्जी मंडी में मॉडर्न निगम परिसर के लिए 140 करोड़ रुपये की मंजूरी, 50 करोड़ रुपये चैलेंज फंड से, तारादेवी में 66 करोड़ रुपये से वेलनेस सेंटर, बालूगंज में 34 करोड़ रुपये से कर्मचारी आवास और बॉन्ड के जरिए 200 करोड़ रुपये जुटाकर फ्लैट निर्माण जैसी योजनाएं शामिल हैं। निगम का कहना है कि आय के स्रोत बढ़ने के बाद ही बजट का आकार बढ़ाया गया है।
अब शहरवासियों के सामने सवाल यह है कि क्या विकास योजनाएं तय समय पर पूरी होंगी या बढ़े हुए टैक्स का बोझ ही ज्यादा महसूस होगा।



