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दर्दनाक हादसा: 22 दिन पहले खरीदी थी Sports बाइक, तेज रफ्तारी से आ के पेड़ से टकराई,इकलौते बेटे की मौत

➤ देहरा के पास खबली दोसड़का में पेड़ से टकराई बाइक, 17 वर्षीय छात्र की मौत
➤ 22 दिन पहले खरीदी थी 220 सीसी नई पल्सर एन सीरीज बाइक
➤ टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान तोड़ा दम, गांव व स्कूल में शोक

गौरव सेठी


 एनएच-503 पर हुए एक भीषण सड़क हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में छीन लीं। ग्राम पंचायत ठठलेहड़ के गांव अंब लाहड़, पोस्ट ऑफिस घेड़ मानगढ़ निवासी 17 वर्षीय आदर्श कुमार पुत्र संजय कुमार की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। यह हादसा खबली दोसड़का के समीप उस समय हुआ, जब वह देहरा बाजार से नए कपड़े खरीदकर अपने घर लौट रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आदर्श की मोटरसाइकिल अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े एक आम के पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उसे उठाकर सिविल अस्पताल देहरा पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज, टांडा रेफर कर दिया। वहां डॉक्टरों ने उसे बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन देर रात उसने दम तोड़ दिया।

आदर्श गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनखंडी में प्लस टू का छात्र था। वह पढ़ाई में मेहनती, मिलनसार और सरल स्वभाव का बताया जाता है। स्कूल में जल्द होने वाली फेयरवेल पार्टी की तैयारियों को लेकर वह उत्साहित था और दोस्तों के साथ कार्यक्रम की योजना बना रहा था। उसके असमय निधन से स्कूल प्रशासन, शिक्षक और छात्र गहरे सदमे में हैं। गांव अंब लाहड़ में भी शोक की लहर दौड़ गई है।

परिजनों के अनुसार, आदर्श ने महज 22 दिन पहले ही नई 220 सीसी बजाज पल्सर एन सीरीज 220 बाइक खरीदी थी। परिवार ने उसे समझाया भी था, लेकिन उसने बाइक लेने की जिद की। किसी को यह अंदेशा नहीं था कि नई बाइक इतनी जल्दी उसके जीवन का अंत बन जाएगी।

आदर्श अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और दो बहनों का अकेला भाई। बड़ी बहन प्रिया बठिंडा में नर्स के रूप में कार्यरत हैं, जबकि छोटी बहन रिया चंडीगढ़ में सीए के रूप में कार्य कर रही हैं। पिता संजय कुमार एक छोटी दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटे की असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मामले की पुष्टि करते हुए देहरा पुलिस जिला के एसपी मयंक चौधरी ने बताया कि हादसे की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी।

यह हादसा एक बार फिर नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन चलाने के गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है। कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद कई बार अभिभावक भावनात्मक दबाव या लापरवाही में बच्चों को वाहन सौंप देते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा नियमों का पालन और अभिभावकों की जिम्मेदारी ही ऐसे हादसों को रोक सकती है।