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करेरी, त्रिउंड और हिमानी चामुंडा ट्रैक दिन में खुले, नाइट ट्रैकिंग पर पाबंदी

करेरी लेक, त्रिउंड और आदि हिमानी चामुंडा ट्रैक दिन में खुले
नाइट ट्रैकिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध जारी
3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोक बरकरार


धर्मशाला में ट्रैकिंग गतिविधियों को लेकर जिला प्रशासन ने अहम फैसला लिया है। पर्यटकों की सुरक्षा और पर्यटन के संतुलन को ध्यान में रखते हुए कांगड़ा प्रशासन ने करेरी लेक, त्रिउंड और आदि हिमानी चामुंडा ट्रैक को दिन के समय खोलने की अनुमति दे दी है, जबकि नाइट ट्रैकिंग पर पूर्ण प्रतिबंध बरकरार रखा गया है। आदेश के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

जिला दंडाधिकारी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धाराओं 33 व 34 के तहत ट्रैकिंग गतिविधियों से जुड़े पूर्व आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए चयनित ट्रैकिंग रूट्स को दिन के समय खोलने की अनुमति प्रदान की है। यह निर्णय पर्यटन गतिविधियों को संतुलित रखते हुए पर्यटकों और स्थानीय लोगों की जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

नए आदेश के अनुसार करेरी लेक ट्रेक, त्रिउंड ट्रेक और आदि हिमानी चामुंडा ट्रेक पर अब केवल सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ट्रैकिंग की अनुमति रहेगी। जिला प्रशासन ने इन रूट्स के लिए पुलिस स्टेशन में पूर्व सूचना प्रपत्र जमा कराने की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी है, जिससे ट्रैकर्स और स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को राहत मिलेगी। हालांकि स्पष्ट किया गया है कि सभी ट्रैकिंग रूट्स पर नाइट ट्रैकिंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

जिला दंडाधिकारी ने बताया कि उक्त तीन रूट्स को छोड़कर 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ट्रैकिंग पर पूर्व में लगाया गया प्रतिबंध यथावत लागू रहेगा। साथ ही यदि भारतीय मौसम विभाग द्वारा किसी प्रकार की चेतावनी या अलर्ट जारी किया जाता है तो ट्रैकिंग गतिविधियां तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी जाएंगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि आदेशों के उल्लंघन की स्थिति में ट्रेकर और संबंधित गाइड के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धाराओं 51 से 60 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित गाइड का लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की संस्तुति भी की जा सकती है।

प्रशासन का मानना है कि यह कदम पर्यटन और सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करेगा तथा पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित गतिविधियों से होने वाले संभावित जोखिमों को कम करेगा।