■ केंद्र की पर्यटन व सांस्कृतिक योजनाओं से हिमाचल को नई दिशा मिलने की उम्मीद
■ “जहाँ चाह वहाँ राह” के साथ समन्वित विकास पर जोर
हमीरपुर में भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से उनके निवास पर आत्मीय भेंट की। इस दौरान टंडन ने कहा कि प्रो. धूमल का सार्वजनिक जीवन सादगी, पारदर्शिता और जनसेवा के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विकास, संगठन सुदृढ़ीकरण और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर उनका दृष्टिकोण सदैव स्पष्ट, दूरदर्शी और प्रेरणादायी रहा है। ऐसे वरिष्ठ और अनुभवी नेतृत्व का सान्निध्य कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का स्रोत है।
टंडन ने बातचीत के दौरान संघीय बजट 2026-27 का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए कई दूरगामी प्रस्ताव रखे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों — अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा — में मंदिरों और मठों के संरक्षण, तीर्थ केंद्रों के विकास तथा आवागमन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई गई है। उनका कहना था कि इससे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भारत पहली बार ‘ग्लोबल बिग कैट समिट’ की मेजबानी करेगा, जिसमें 95 देशों के नेता और मंत्री भाग लेंगे। यह आयोजन पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करेगा। इसके अतिरिक्त पूर्वोदय राज्यों में पाँच बड़े पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे और बेहतर परिवहन व्यवस्था के लिए 4000 ई-बसें चलाई जाएंगी।
संजय टंडन ने यह भी बताया कि भारत को चिकित्सा पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से पाँच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। वहीं देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को जीवंत बनाने के लिए लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को अनुभवात्मक सांस्कृतिक स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
टंडन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विविधता के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण है। यदि राज्य सरकार केंद्र की योजनाओं और दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रभावी समन्वय स्थापित करे तो प्रदेश पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयाँ छू सकता है। उन्होंने कहा, “जहाँ चाह वहाँ राह। यदि नीति और नीयत स्पष्ट हो तो हिमाचल को आसमान छूने से कोई नहीं रोक सकता।”
अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से हिमाचल प्रदेश वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त पहचान स्थापित करेगा।



