➤ मुआवजा न देने पर एडीजे रोहड़ू का सख्त आदेश, पीडब्ल्यूडी की संपत्तियां होंगी अटैच
➤ जुब्बल, हाटकोटी, खड़ापत्थर विश्राम गृह और ईई कार्यालय पर कुर्की की प्रक्रिया
➤ करीब 3 करोड़ रुपये बकाया, 17 मार्च तक कार्रवाई रिपोर्ट तलब
भूमि अधिग्रहण मुआवजा समय पर न देने के मामले में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (एडीजे) रोहड़ू की अदालत ने लोक निर्माण विभाग के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसकी सरकारी संपत्तियों को अटैच करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने भूमि मालिकों की ओर से दायर दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
न्यायालय ने 18 फरवरी को पारित आदेश में स्पष्ट कहा कि मुआवजा राशि का भुगतान समय पर न होने के कारण विभाग की संपत्तियों के विरुद्ध कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाए। आदेश के तहत लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह जुब्बल, हाटकोटी और खड़ापत्थर सहित अधिशासी अभियंता कार्यालय, जुब्बल डिविजन से संबंधित संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
पहले मामले में शिकायतकर्ता चेत राम, निवासी गांव शलाड, तहसील जुब्बल और दूसरे मामले में राजेश कुमार ने याचिका दायर की थी। दोनों मामलों में हिमाचल प्रदेश सरकार, लोक निर्माण विभाग साउथ जोन शिमला के भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, जिला कलेक्टर शिमला और लोक निर्माण विभाग जुब्बल डिविजन के कार्यकारी अभियंता को पक्षकार बनाया गया है।
अदालत ने संबंधित विभागों को 17 मार्च तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। दोनों याचिकाओं में कुल मिलाकर करीब तीन करोड़ रुपये की मुआवजा राशि देय बताई गई है।
दरअसल, यह मामला वर्ष 1988-89 का है, जब नंदपुर पंचायत में बलाई गांव के लिए सड़क निर्माण के दौरान वादियों के फलदार बगीचों के पौधे काट दिए गए थे। आरोप है कि इसके बदले उचित और समयबद्ध मुआवजा नहीं दिया गया। लंबे समय से लंबित इस मामले में अब अदालत के सख्त आदेश ने विभाग पर कानूनी दबाव बढ़ा दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान या संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई तो विभाग को और कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।



