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हिमाचल में दो कार्यकाल से आरक्षित पंचायत प्रधान और सदस्य पद अब होंगे अनारक्षित


सरकार ने पंचायती राज नियमों में संशोधन के लिए जारी किए ड्राफ्ट नियम
जनता से पांच दिन के भीतर मांगे गए सुझाव और आपत्तियां


शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले सरकार ने आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। मंत्रिमंडल के फैसले के बाद पंचायती राज विभाग ने संशोधित नियमों का ड्राफ्ट जारी कर दिया है, जिसके तहत लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रही पंचायत प्रधान और वार्ड सदस्य की सीटें अब इस बार अनारक्षित (ओपन) की जा सकती हैं।

जारी अधिसूचना के अनुसार यदि किसी ग्राम पंचायत में वार्ड सदस्य या प्रधान का पद लगातार दो चुनावों तक किसी एक श्रेणी के लिए आरक्षित रहा है, तो आगामी चुनाव में उस पद को उसी श्रेणी के लिए आरक्षित नहीं किया जाएगा और उसे सामान्य श्रेणी (ओपन) माना जाएगा।

हालांकि यह प्रावधान तभी लागू होगा जब जिले या राज्य में आरक्षण का कुल निर्धारित प्रतिशत प्रभावित न हो। यदि आरक्षण हटाने से निर्धारित कोटा पूरा नहीं होता है तो फिर पुरानी आरक्षण व्यवस्था ही लागू रहेगी।

पंचायती राज विभाग ने इन ड्राफ्ट नियमों को लेकर आम जनता से पांच दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी।

प्रस्तावित संशोधन के तहत पंचायती राज नियम 2026 लागू होने पर नियम 28 और नियम 87 में बदलाव किया जाएगा। नियम 28 में पंचायत सदस्य पद के आरक्षण से संबंधित प्रावधान में नया नियम जोड़ा गया है, जबकि नियम 87 ग्राम पंचायत प्रधान के पद से जुड़ा हुआ है, जिसमें भी दो कार्यकाल तक आरक्षित रहने की स्थिति में सीट को अनारक्षित करने का प्रावधान रखा गया है।

इसी तरह यदि जिला परिषद या पंचायती समिति के अध्यक्ष का पद भी लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रहा है, तो उसे भी आगामी चुनाव में अनारक्षित माना जा सकता है।

सरकार के इस प्रस्तावित कदम को पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल कई पंचायतों में लगातार एक ही श्रेणी के लिए सीट आरक्षित रहने पर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आपत्तियां उठती रही हैं।

अब सरकार द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट नियमों पर मिलने वाले सुझावों और आपत्तियों के आधार पर पंचायत चुनावों से पहले अंतिम निर्णय लिया जाएगा।