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दिल्ली में हिमाचल के किसानों-बागवानों का जन आक्रोश, सेब पर ड्यूटी घटाने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

दिल्ली के रामलीला मैदान में किसानों-बागवानों की जन आक्रोश रैली
अमेरिका ट्रेड डील और सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने का विरोध
मनरेगा बहाली, लेबर कोड रद्द और किसान अधिकारों की मांग


हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ राजधानी दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में किसान और बागवान रामलीला मैदान में जुटे और ‘जन आक्रोश रैली’ के जरिए अपनी मांगों को बुलंद किया। हिमाचल के अलावा उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इस रैली में शामिल हुए।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के आह्वान पर हिमाचल से किसान-बागवान बीती रात ही दिल्ली पहुंच गए थे। इस दौरान महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उन्हें किसान-मजदूर विरोधी बताया।

दिल्ली में जन आक्रोश रैली के लिए पहुंचे हिमाचल के किसान-बागवान।

रैली को संबोधित करते हुए Sanjay Chauhan ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने वाली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर बड़े पूंजीपतियों के कर्ज माफ किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों और मजदूरों के हितों की अनदेखी की जा रही है।

दिल्ली के रामलीला मैदान में हिमाचल के किसान-बागवान जन आक्रोश रैली के दौरान।

उन्होंने रैली के माध्यम से कई मांगें उठाईं, जिनमें चार लेबर कोड को रद्द करने, भारत-अमेरिका ट्रेड डील को खत्म करने, मनरेगा को पुराने स्वरूप में बहाल करने, बिजली संशोधन बिल 2025 को वापस लेने, स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने और किसानों को कम से कम पांच बीघा जमीन का कानूनी अधिकार देने की मांग प्रमुख रही।

इसके अलावा माकपा ने हिमाचल के आपदा प्रभावितों को जमीन के बदले जमीन देने और राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बहाल करने की भी मांग की।

रैली में शामिल माकपा नेता और सेब बागवान सोहन ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अमेरिकी सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 50 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करना और यूरोपीय यूनियन के सेब पर इसे 20 प्रतिशत तक कम करना सीधे तौर पर हिमाचल के बागवानों के हितों के खिलाफ है।

उन्होंने चेतावनी दी कि इस फैसले से विदेशी सेब सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में आएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान होगा। इससे हिमाचल का करीब 5500 करोड़ रुपये का सेब उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है और हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

रैली के अंत में नेताओं ने साफ किया कि जब तक केंद्र सरकार इन नीतियों को वापस नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और आने वाले समय में इसे और तेज किया जाएगा।