➤ नाबार्ड योजनाओं के आवंटन को लेकर सदन में गरमाया माहौल
➤ भाजपा ने सरकार पर विपक्षी विधायकों की अनदेखी का लगाया आरोप
➤ मुख्यमंत्री बोले—प्रदेश का समान विकास हमारी प्राथमिकता
Himachal Assembly, Budget Session, Jayram Thakur, Himachal Politics, NABARD Schemesहिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में शनिवार को केंद्रीय योजनाओं के आवंटन को लेकर सदन का माहौल काफी गरमाया रहा। विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नाचन से भाजपा विधायक विनोद कुमार ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार विपक्षी विधायकों की अनदेखी कर रही है और नाबार्ड के तहत सड़क योजनाओं की स्वीकृति नहीं दी जा रही है।
सदन में यह मुद्दा उठाते हुए विनोद कुमार ने कहा कि उनके क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कई योजनाएं लंबित पड़ी हैं और उन्हें मंजूरी नहीं मिल रही है। इस दौरान नेता विपक्ष जयराम ठाकुर भी सरकार पर हमलावर नजर आए। उन्होंने सदन में कांग्रेस विधायकों को स्वीकृत योजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सरकार राजनीतिक आधार पर भेदभाव कर रही है और विपक्षी क्षेत्रों को योजनाओं से वंचित किया जा रहा है।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार बदले की भावना से काम कर रही है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य पूरे प्रदेश का समान और संतुलित विकास करना है। उन्होंने कहा कि पहले के समय में केवल धर्मपुर और सराज जैसे क्षेत्रों को ही अधिक योजनाएं दी जाती थीं, लेकिन अब सरकार पूरे प्रदेश को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी दिल्ली जाकर हिमाचल प्रदेश का बजट रुकवाने की कोशिश नहीं करे, तो राज्य में पैसों की कोई कमी नहीं होगी और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ेंगे।
इस बीच प्रश्नकाल के दौरान अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि जिला मंडी के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में बनाए गए पानी के टैंकों की गुणवत्ता की जांच करवाई जाएगी। कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने सदन में यह मामला उठाते हुए कहा कि कई जगह पानी के टैंक फट चुके हैं और अगर मानसून से पहले इन्हें ठीक नहीं किया गया तो जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि धर्मपुर क्षेत्र में कुल 550 पानी के टैंक बनाए गए हैं, जिनमें से 215 टैंक 50 हजार से 1 लाख लीटर क्षमता के हैं, जबकि 49 टैंक 1 लाख लीटर से अधिक क्षमता के हैं। इनकी स्थिति की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश के सरकारी कार्यालयों के बिजली मीटर पोस्टपेड करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रीपेड मीटर मोबाइल फोन की तरह काम करेंगे, जिनमें उपभोक्ता अपने फोन से ही देख सकेंगे कि कितनी बिजली खर्च हो रही है और कब रिचार्ज करना है।



