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एंट्री टैक्स विवाद पर हिमाचल की सुक्‍खू सरकार नरम: सीमावर्ती इलाकों में दरें घटाने के संकेत, विरोध के बीच पुनर्विचार

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एंट्री टैक्स विवाद पर हिमाचल सरकार नरम, सीमावर्ती इलाकों में दरें घटाने के संकेत
सीएम सुक्खू बोले- पंजाब सीमा से सटे क्षेत्रों के लिए होगा पुनर्विचार
विरोध के बीच विधानसभा में 58,830.67 करोड़ रुपए का बजट भी पारित


शिमला। हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स बढ़ोतरी को लेकर लगातार बढ़ते विरोध के बीच अब सुक्खू सरकार नरम पड़ती नजर आ रही है। विधानसभा में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ संकेत दिए कि पंजाब सीमा से सटे क्षेत्रों में एंट्री टैक्स की दरें घटाई जाएंगी। यह फैसला सीमावर्ती इलाकों में हो रहे विरोध और रोजाना आने-जाने वाले लोगों की परेशानियों को देखते हुए लिया गया है।

सदन में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने कोई नया एंट्री टैक्स नहीं लगाया, बल्कि यह पहले से लागू व्यवस्था है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण NHAI FASTag प्रणाली और शुल्क संरचना में बदलाव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए दरों में राहत दी जाए।

यह मुद्दा प्रश्नकाल के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि पंजाब सीमा से आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और यह मामला अब दोनों राज्यों के बीच चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि पंजाब सरकार से भी इस मुद्दे पर बातचीत की जाए।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन सिंह चौहान ने सदन में बताया कि मुख्यमंत्री ने इस मामले पर पुनर्विचार का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में हो रहे प्रदर्शन और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ते विरोध को देखते हुए जल्द समाधान निकाला जाएगा, क्योंकि राज्य के कई बड़े औद्योगिक क्षेत्र सीमा से लगे इलाकों में स्थित हैं और इसका असर उद्योगों व व्यापार पर भी पड़ सकता है।

सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए रियायती पास जारी करने पर भी विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार रोजाना सीमा पार करने वाले लोगों के लिए concessional entry pass योजना अगली कैबिनेट बैठक में ला सकती है।

इसी बीच विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का कुल बजट 58,830.67 करोड़ रुपए के साथ पारित कर दिया गया। पहले 21 मार्च को मुख्यमंत्री ने 54,928 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था, जिसमें अब 3,902.67 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई है।

शिक्षा विभाग के लिए 8,848.86 करोड़ रुपए, स्वास्थ्य विभाग के लिए 2,704.54 करोड़ रुपए, PWD के लिए 2,481.76 करोड़ रुपए राजस्व व्यय तथा 1,104.82 करोड़ पूंजीगत व्यय तय किया गया है। इसके अलावा ग्रामीण विकास, सिंचाई, बिजली और कृषि विभाग के लिए भी बड़े बजट प्रावधान किए गए हैं।

सदन में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। देहरा विधायक कमलेश ठाकुर ने मछुआरों की समस्या उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं कुल्लू और मनाली क्षेत्र में ब्यास नदी की ड्रेजिंग को लेकर भी सरकार ने चरणबद्ध कार्यवाही की बात कही।

विधानसभा के बाहर कांग्रेस के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर ने भी धरना देकर विभिन्न आरोपों को लेकर ज्ञापन सौंपा, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्मा गया।