➤ शिमला, कुल्लू और मंडी में भारी ओलावृष्टि से सेब व सब्जी फसलें तबाह
➤ एंटी हेल नेट फटे, कई जगह बांस टूटे; बागवानों को भारी नुकसान
➤ लाहौल-स्पीति में ताजा बर्फबारी, 9 अप्रैल तक बारिश-ओलावृष्टि का अलर्ट
हिमाचल प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। रविवार दोपहर बाद शिमला, कुल्लू और मंडी के कई इलाकों में हुई भारी ओलावृष्टि ने व्यापक तबाही मचाई है। सबसे ज्यादा नुकसान सेब के बागानों और मौसमी सब्जियों को हुआ है। बागवानों के अनुसार कई क्षेत्रों में 25 से 30 मिनट तक लगातार ओले गिरते रहे, जिससे सेब की नई फसल, मटर, फूलगोभी और अन्य सब्जियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। राज्य के कई हिस्सों में हाल के दिनों में इसी तरह की ओलावृष्टि से बागवानी को नुकसान की खबरें सामने आई हैं।

कई बागानों में सेब को ओलों से बचाने के लिए लगाए गए एंटी हेल नेट भी इस बार मौसम की मार नहीं झेल सके। तेज ओलावृष्टि के कारण नेट फट गए, जबकि उन्हें संभालने के लिए लगाए गए बांस और सपोर्ट पोल टूट गए। कोटखाई, कुमारसैन और आनी जैसे इलाकों में बागवानों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। पिछले पांच दिनों से लगातार बदलते मौसम ने बागवानी क्षेत्र की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी राहत के संकेत नहीं दिए हैं। 7 और 8 अप्रैल को शिमला, चंबा, कुल्लू, कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी ओलावृष्टि और तेज तूफान का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों के लिए येलो अलर्ट घोषित किया गया है। 9 अप्रैल तक बादलों के बरसने और मौसम के खराब बने रहने की संभावना जताई गई है।
दूसरी ओर, लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है। गोंदला में 28.5 सेंटीमीटर, केलांग में 20 सेंटीमीटर, हंसा में 5 सेंटीमीटर और कुकुमसेरी में 1.3 सेंटीमीटर हिमपात हुआ है। अप्रैल में हुई इस बर्फबारी ने तापमान में भी बड़ी गिरावट ला दी है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अप्रैल में बर्फ और ओलों के वीडियो साझा किए हैं, जिससे मौसम की असामान्य स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।

ओलावृष्टि और बर्फबारी के बाद प्रदेश के अधिकतम तापमान में औसतन करीब 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। नाहन, सोलन और शिमला समेत कई शहरों में तापमान सामान्य से नीचे चला गया है। इससे एक ओर जहां ठंडक बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर किसानों और बागवानों की मेहनत पर मौसम की मार ने चिंता और बढ़ा दी है।




