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हिमाचल में 108-102 एंबुलेंस कर्मियों की 5 दिन की हड़ताल, सचिवालय के बाहर कर्मचारियों का महापड़ाव शुरू

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हिमाचल में 108-102 एंबुलेंस कर्मियों की 5 दिन की हड़ताल शुरू
प्रदेश सचिवालय के बाहर कर्मचारियों का महापड़ाव, सेवाएं प्रभावित
न्यूनतम वेतन, बहाली और श्रम कानून लागू करने की मांग



हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बीती रात 8 बजे से शुरू हुई यह प्रदेशव्यापी हड़ताल अगले पांच दिनों तक जारी रहेगी। यूनियन के अनुसार यह हड़ताल 132 घंटे, यानी 11 अप्रैल तक चलेगी। हड़ताल के चलते प्रदेशभर में एंबुलेंस सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो गई हैं, जिससे आम जनता और विशेषकर आपातकालीन मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

राजधानी शिमला में मंगलवार को छोटा शिमला स्थित राज्य सचिवालय के बाहर सीटू के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी एकत्र हुए और प्रदर्शन शुरू किया। कर्मचारियों ने सचिवालय के बाहर पांच दिन-रात महापड़ाव करने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं और सरकार व कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।

यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों को लंबे समय से न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों को कंपनी द्वारा नौकरी से निकाले जाने, श्रम कानूनों और न्यायालय के आदेशों को लागू न करने तथा कर्मचारियों के साथ कथित प्रताड़ना के मुद्दे भी आंदोलन के केंद्र में हैं। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि जब तक इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।

यूनियन के महासचिव बालक राम ने कहा कि कर्मचारी काफी समय से अपनी जायज़ मांगों को उठा रहे हैं, लेकिन न तो सरकार और न ही कंपनी प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक कदम उठाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को लगातार मानसिक और प्रशासनिक दबाव में रखा जा रहा है तथा उनके श्रम अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।

हड़ताल के चलते आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सीधा असर पड़ रहा है। 108 और 102 सेवाएं प्रदेश में दुर्घटनाओं, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए जीवनरेखा मानी जाती हैं। ऐसे में पांच दिन तक सेवाएं प्रभावित रहने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द बातचीत कर समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस हड़ताल ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।