➤ शिमला, कुल्लू, मंडी, सोलन और किन्नौर में 40% से 60% तक फसल नुकसान
➤ ओलावृष्टि से सेब के फूल झड़े, गेहूं की तैयार फसल खेतों में बिछी
➤ किसानों-बागवानों ने सरकार से त्वरित मुआवजा और बीमा भुगतान की मांग की
हिमाचल Pradesh में पिछले एक सप्ताह से जारी बेमौसमी बारिश, बर्फबारी, ओलावृष्टि और तेज आंधी-तूफान ने किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी है। राज्य के शिमला, कुल्लू, मंडी, सोलन और किन्नौर जिलों में मौसम की मार से सेब, गेहूं, जौ, मटर और स्टोन फ्रूट्स की तैयार फसल को 40 से 60 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। हालिया रिपोर्टों में भी हिमाचल के सेब बेल्ट और सोलन क्षेत्र में भारी नुकसान की पुष्टि हुई है।
शिमला और कुल्लू के ऊंचाई वाले इलाकों में फ्लावरिंग स्टेज पर ओले गिरने से सेब के पेड़ों के फूल झड़ गए हैं, जिससे इस सीजन के उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में कई जगह एंटी-हेल नेट भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
वहीं मंडी, बिलासपुर, कांगड़ा और हमीरपुर में कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। लगातार नमी और बारिश के कारण बालियों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। उत्तर भारत के कई राज्यों में इसी तरह गेहूं की फसलों को नुकसान की रिपोर्ट सामने आई है।
सेब बागवानों का कहना है कि पिछले वर्ष सूखे की मार झेलने के बाद इस बार ओलावृष्टि ने उनकी उम्मीदें तोड़ दी हैं। किसानों ने सरकार से मांग की है कि जल्द विशेष गिरदावरी और नुकसान का आंकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए।
किसान नेता और बागवान हरीश चौहान ने कहा कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना का लाभ भी समय पर नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि बीमा कंपनियां नुकसान के बाद भुगतान में देरी कर रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्व एवं बागवानी मंत्री Jagat Singh Negi ने कहा है कि विभाग को नुकसान के आकलन के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा मुआवजा राशि बेहद कम है और इसे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा। साथ ही, बीमा कंपनियों द्वारा भुगतान में लापरवाही पर कार्रवाई का भी आश्वासन दिया गया है।



