➤ अवैध खनन और रिकॉर्ड गड़बड़ी मामले में दोनों आरोपियों ने CJM कोर्ट में सरेंडर किया
➤ सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद पुलिस ने किया गिरफ्तार
➤ भाजपा ने कार्रवाई को प्रतिशोध की राजनीति बताया
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में भाजपा विधायक Ashish Sharma से जुड़े कथित अवैध खनन और स्टोन क्रशर मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विधायक के चाचा और भाई ने सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद आज CJM कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
कोर्ट ने दोनों आरोपियों उमेश शर्मा और प्रवीण कुमार को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। अब उन्हें कल दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। मामले में इससे पहले हिमाचल हाईकोर्ट भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका था। इसके बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली और चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सुजानपुर क्षेत्र में संचालित एक स्टोन क्रशर यूनिट से जुड़ा है, जहां पुलिस ने अगस्त 2025 में छापेमारी कर कथित अवैध खनन, रॉयल्टी चोरी और दस्तावेजी अनियमितताओं के सबूत जुटाए थे। जांच में CCTV फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए, जिन्हें अहम साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार इस मामले में राज्य को लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस केस में कुल चार आरोपी शामिल हैं, जिनमें से दो को पहले सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है, जबकि विधायक के चाचा और भाई को राहत नहीं मिली। पुलिस द्वारा पेश दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर उनकी जमानत याचिकाएं लगातार खारिज होती रही हैं।
एसपी हमीरपुर बलवीर सिंह ठाकुर ने बताया कि मामला सुजानपुर थाना क्षेत्र में दर्ज है और सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित समयसीमा आज समाप्त हो रही थी, जिसके चलते दोनों आरोपियों ने अदालत में सरेंडर किया।
भाजपा ने क्या कहा?
इस कार्रवाई पर भाजपा ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। पार्टी प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बना रही है। भाजपा ने इसे सत्ता के दुरुपयोग और एजेंसियों के दुरुपयोग का मामला बताया है।



