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पहली जून को वेतन नहीं मिला तो 2 जून से HRTC बसों का चक्का जाम करने की चेतावनी

पहली जून को वेतन नहीं मिला तो 2 जून से HRTC बसों का चक्का जाम करने की चेतावनी

कर्मचारियों ने कहा- हर महीने वेतन में देरी अब बर्दाश्त नहीं होगी

ओवरटाइम और अन्य मदों में करीब 125 करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित


हिमाचल प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों ने वेतन में लगातार हो रही देरी को लेकर सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। HRTC चालक-परिचालक यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कर्मचारियों को पहली जून तक वेतन जारी नहीं किया गया तो 2 जून से प्रदेशभर में निगम की बसों का चक्का जाम कर दिया जाएगा। यूनियन का कहना है कि उस स्थिति में कोई भी चालक और परिचालक बसों का संचालन नहीं करेगा।

कर्मचारियों का कहना है कि वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बैंक ऋण की किस्तें, बच्चों की स्कूल फीस, घरेलू खर्च और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में हर महीने वेतन के लिए इंतजार करना कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।

HRTC चालक-परिचालक यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों की ओवरटाइम राशि और अन्य मदों में लगभग 125 करोड़ रुपये की देनदारियां अब भी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि यूनियन पहले भी कई बार इस मुद्दे को सरकार और प्रबंधन के समक्ष उठा चुकी है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

गौरतलब है कि इससे पहले भी 12 मई को कर्मचारियों ने वेतन न मिलने पर चक्का जाम की चेतावनी दी थी। उस समय कर्मचारियों के कड़े रुख को देखते हुए निगम प्रबंधन ने तत्काल वेतन जारी कर दिया था। अब एक बार फिर कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि पहली तारीख को वेतन नहीं मिला तो दो जून से प्रदेशभर में बसों का संचालन प्रभावित होगा।

यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि चक्का जाम की नौबत आती है तो उससे यात्रियों को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी सरकार और निगम प्रबंधन की होगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल अपने अधिकारों और समय पर वेतन की मांग कर रहे हैं।

HRTC प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। निगम के बेड़े में वर्तमान में 3200 से अधिक बसें शामिल हैं, जो राज्य के दूरदराज क्षेत्रों तक परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। निगम 31 डिपो के माध्यम से पूरे प्रदेश में अपनी सेवाएं संचालित कर रहा है और प्रतिदिन पांच लाख से अधिक यात्री इसकी बसों में सफर करते हैं।

राज्य सरकार हर वर्ष 700 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता HRTC को उपलब्ध कराती है। इसके बावजूद निगम आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। छात्रों, कर्मचारियों और विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों को रियायती या मुफ्त यात्रा सुविधा देने पर सरकार को सालाना 110 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने पड़ते हैं।

हाल ही में HRTC ने अपने संचालन के 50 वर्ष पूरे किए हैं। वर्ष 1974 में शुरू हुई निगम की यात्रा आज भी प्रदेश के लाखों लोगों के लिए जीवनरेखा बनी हुई है। हालांकि वर्तमान समय में निगम पर 2050 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा बताया जा रहा है, जो इसकी आर्थिक स्थिति पर लगातार दबाव बना रहा है।

अब सभी की निगाहें सरकार और HRTC प्रबंधन पर टिकी हैं कि वे कर्मचारियों की मांगों को लेकर क्या फैसला लेते हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।