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महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का विपक्ष पर बड़ा हमल, चार दलों को बताया ‘भ्रूण हत्या का गुनहगार’


PM मोदी ने महिला आरक्षण बिल गिरने पर चार दलों पर साधा निशाना
कांग्रेस, TMC, DMK और सपा को बताया ‘भ्रूण हत्या का गुनहगार’
देश के नाम संबोधन में महिलाओं से मांगी माफी, सियासत गरमाई



नई दिल्ली। देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पारित न हो पाने पर गहरी नाराजगी जताई और विपक्ष के चार प्रमुख दलों—कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और समाजवादी पार्टी (सपा)—पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने इस घटनाक्रम को देश की नारी शक्ति के साथ अन्याय करार देते हुए कहा कि यह केवल एक विधेयक का गिरना नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों पर बड़ा आघात है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश की महिलाओं से माफी मांगते हुए कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया, इसके लिए मैं सभी माताओं-बहनों से क्षमाप्रार्थी हूं।” उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट थी, लेकिन कुछ दलों की राजनीति ने इस महत्वपूर्ण पहल को विफल कर दिया। उनके अनुसार जब देश की करोड़ों महिलाएं संसद की ओर उम्मीद से देख रही थीं, तब प्रस्ताव गिरने पर कुछ दलों का व्यवहार निराशाजनक था।

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने तीखे शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि इन दलों ने “सदन में इस प्रयास की भ्रूण हत्या कर दी” और इन्हें “देश की नारी शक्ति और संविधान का अपराधी” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने बार-बार तकनीकी पेच और बहानों का सहारा लेकर महिला सशक्तीकरण को रोकने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री के मुताबिक यह वही राजनीति है, जिसमें “दल हित, देश हित से ऊपर रखा जाता है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अगर यह विधेयक पारित हो जाता, तो तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी प्रतिनिधित्व बढ़ता और महिलाओं को अधिक अवसर मिलते। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने अपने ही राज्यों के हितों के साथ समझौता किया है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह न तो अपनी पुरानी गलतियों को सुधारना चाहती है और न ही क्षेत्रीय दलों को मजबूत होते देखना चाहती है।

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर “झूठ और भ्रम फैलाने” का आरोप लगाते हुए कहा कि कभी संख्या तो कभी अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर देश को गुमराह किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ दलों को डर है कि अगर महिलाएं बड़े स्तर पर राजनीति में आगे आईं, तो उनके पारंपरिक नेतृत्व को चुनौती मिलेगी।

इस संबोधन के बाद देशभर में सियासी माहौल गरमा गया है। जहां एक ओर भाजपा समर्थकों ने प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन किया है, वहीं विपक्षी दलों ने इस बयान को राजनीतिक हमला बताते हुए पलटवार शुरू कर दिया है। महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर यह टकराव आने वाले समय में और तेज हो सकता है।