➤ हाईकोर्ट ने कांस्टेबल प्रमोशन पर सरकार की अपील खारिज की
➤ गृह सचिव की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी 8 हफ्तों में देगी रिपोर्ट
➤ कोर्ट बोला—20 साल बाद भी नहीं मिल रहा उचित पद, व्यवस्था में सुधार जरूरी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबलों की पदोन्नति (Promotion) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस कर्मियों की सेवा शर्तों में सुधार और समयबद्ध पदोन्नति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि गृह सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी गठित की जाए, जिसमें 11 सदस्य होंगे, जिनमें से 9 पुलिस विभाग के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह कमेटी कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करेगी और 8 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वर्तमान में खासकर जनरल ड्यूटी कांस्टेबलों के लिए प्रमोशन के अवसर बेहद सीमित हैं। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि 20 साल की सेवा के बाद भी कई कांस्टेबलों को केवल मानद हेड कांस्टेबल का दर्जा मिलता है, लेकिन कार्य वही करना पड़ता है।
इतना ही नहीं, इस पद पर उन्हें केवल 80 से 200 रुपये का मामूली वित्तीय लाभ मिलता है, जिसे अदालत ने अपर्याप्त माना। कोर्ट ने कहा कि पुलिस कर्मियों को ओवरटाइम भत्ता, साप्ताहिक अवकाश, आवास सुविधा और उच्च शिक्षा के अवसर जैसे लाभ मिलने चाहिए।
सेवानिवृत्ति लाभ पर भी सख्ती:
हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में यह भी साफ किया कि जांच के नाम पर सेवानिवृत्ति लाभ लंबे समय तक रोकना गलत है। अदालत ने आदेश दिया कि एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ 6 सप्ताह के भीतर जारी किए जाएं।
कोर्ट ने कहा कि यदि समय पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की जाती, तो विभाग को लाभ रोकने का अधिकार नहीं है।



