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शिमला के पंथाघाटी तिब्बती मठ में धूमधाम से मनाई गई 2570वीं बुद्ध पूर्णिमा


विश्व शांति के लिए विशेष पूजा-अर्चना और प्रार्थनाओं का आयोजन
भगवान बुद्ध के त्रिसम योग दिवस के रूप में मनाया गया पावन पर्व


शिमला के पंथाघाटी स्थित तिब्बती मठ में शुक्रवार को 2570वीं वैसाख बुद्ध पूर्णिमा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। इस पावन अवसर पर सुबह से ही मठ परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान बुद्ध के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

मठ में पूरे दिन आध्यात्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालु शांति एवं करुणा के संदेश को आत्मसात करने के लिए प्रार्थनाओं में शामिल हुए। थूपतेन दोर्जे डार्क मोनेस्ट्री के लामा डुलो लोपन ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा को भगवान बुद्ध के जीवन का त्रिसम योग दिवस माना जाता है। इसी दिन उनका जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था, जिससे यह दिन बौद्ध अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है।

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं पूरी दुनिया को शांति, करुणा और अहिंसा का मार्ग दिखाती हैं और आज भी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। इस अवसर पर मठ में विशेष रूप से विश्व शांति के लिए प्रार्थनाएं की गईं, ताकि पूरी दुनिया भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चल सके।

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, खासकर मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और युद्ध को लेकर भी मठ में शांति की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने एक स्वर में प्रार्थना की कि दुनिया में शांति स्थापित हो और मानवता का कल्याण हो।

इस प्रकार, पंथाघाटी तिब्बती मठ में मनाई गई बुद्ध पूर्णिमा ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि वैश्विक शांति और मानव कल्याण का संदेश भी दिया।