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हिमाचल में 128 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं, सरकार देगी 25 लाख

हिमाचल में 128 पंचायतें निर्विरोध चुनी गईं
निर्विरोध पंचायतों को सरकार देगी 25-25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि
पंचायत चुनाव में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी, गांव-गांव तेज हुआ प्रचार


हिमाचल Pradesh में पंचायत चुनावों से पहले कई गांवों में आपसी सहमति और सौहार्द की तस्वीर देखने को मिली है। प्रदेश की 128 ग्राम पंचायतों को निर्विरोध चुन लिया गया है। सरकार की ओर से इन पंचायतों को प्रोत्साहन के तौर पर 25-25 लाख रुपये की राशि दी जाएगी। शुक्रवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन उम्मीदवारों की स्थिति लगभग साफ हो गई और इसके साथ ही कई पंचायतों में बिना मतदान के प्रतिनिधियों का चयन हो गया।

अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार जिला शिमला में सबसे अधिक 42 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं। इसके अलावा सिरमौर जिले में 28 पंचायतें, किन्नौर में 18 और सोलन जिले में 12 पंचायतों का सर्वसम्मति से चयन हुआ है। निचले हिमाचल के विभिन्न जिलों से भी 27 पंचायतों के निर्विरोध चुने जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं बिलासपुर जिले में केवल एक पंचायत ही निर्विरोध चुनी गई है।

लाहौल-स्पीति जिले में भी बड़ी संख्या में पंचायतों में सहमति बनी है। यहां कुल 17 पंचायतों को निर्विरोध चुना गया है, जिनमें लाहौल की 8 और स्पीति की 9 पंचायतें शामिल हैं। कुल्लू जिले की न्योली, शियाह और आनी ब्लॉक की पंचायतों में भी बिना मुकाबले प्रतिनिधि चुने गए हैं। चंबा जिले के सलूणी विकास खंड की करवाल पंचायत और मंडी जिले के चौंतड़ा ब्लॉक की गोलंवा पंचायत भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुई हैं।

ऊना जिले की पांच पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान और पंच प्रतिनिधियों का सर्वसम्मति से चयन किया गया है। इनमें निचला पंडोगा, जखेवाल, बोहरू और उदयपुर पंचायतें शामिल हैं। वहीं पूना बीनेबाल पंचायत भी निर्विरोध चुनी गई है। कांगड़ा जिले के परागपुर ब्लॉक की बगली पंचायत में भी सहमति से प्रतिनिधि चुने गए हैं।

जिला शिमला में इस बार निर्विरोध पंचायतों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। पिछले पंचायत चुनाव में जहां केवल 19 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई थीं, वहीं इस बार यह संख्या बढ़कर 42 पहुंच गई है। जिला पंचायत अधिकारी डॉ. विनय कुमार के अनुसार चौपाल विकास खंड में सबसे अधिक 10 पंचायतों में सर्वसम्मति बनी है। इसके अलावा छोहारा और ठियोग ब्लॉक में सात-सात पंचायतें निर्विरोध चुनी गई हैं। रोहड़ू ब्लॉक की पांच पंचायतों में भी सहमति बनी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे सामाजिक सौहार्द और आपसी समझदारी का उदाहरण माना जा रहा है।

दूसरी ओर पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। खास बात यह है कि इस बार महिला प्रत्याशियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर आ रही हैं। पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए होने के कारण कई गांवों में महिलाएं खुद चुनाव मैदान में उतरी हैं। वहीं कई जगह पति और बेटों के समर्थन में महिलाएं प्रचार की कमान संभाल रही हैं। गांवों में महिला समूह घर-घर जाकर मतदाताओं से समर्थन मांग रहे हैं।

सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर और नारों के जरिए भी चुनाव प्रचार तेज हो गया है। भीषण गर्मी के बावजूद प्रत्याशी लगातार जनसंपर्क में जुटे हैं और गांवों से लेकर बाजारों तक पंचायत चुनाव चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।

इसी बीच सिरमौर जिले के रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र की खालाक्यार पंचायत में नामांकन वापसी के दौरान बड़ा विवाद सामने आया। उपप्रधान पद के एक उम्मीदवार ने नामांकन वापसी का आवेदन एआरओ से छीन लिया और मौके से फरार हो गया। घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। एआरओ ने मामले की शिकायत बीडीओ ददाहू और निर्वाचन अधिकारी को दी। इसके बाद रेणुका थाने में संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई।

बताया जा रहा है कि पंचायत में उपप्रधान पद के लिए चार उम्मीदवार मैदान में थे। शुक्रवार को तीन उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए थे। इसके बाद एक उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस लेने के कुछ देर बाद ही एआरओ से दस्तावेज छीन लिया। इस घटना के कारण नामांकन वापसी की प्रक्रिया प्रभावित हुई और पूरे ब्लॉक में प्रत्याशियों के अंतिम आंकड़ों की घोषणा देर रात तक अटकी रही। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।