➤ तीन अनिवार्य विषय पास करने वाले ही दे सकेंगे 10वीं की दूसरी परीक्षा
➤ दो विषयों में फेल होने वाले विद्यार्थियों को रखा जाएगा पुनरावृत्ति श्रेणी में
➤ अंक सुधार के लिए अधिकतम तीन विषयों में परीक्षा देने की मिलेगी अनुमति
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने ड्यूल परीक्षा प्रणाली के तहत होने वाली 10वीं कक्षा की दूसरी परीक्षा के लिए पात्रता नियम तय कर दिए हैं। बोर्ड की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, इस माह के आखिर और जून में आयोजित होने वाली दूसरी परीक्षा में वही विद्यार्थी बैठ सकेंगे, जिन्होंने पांच अनिवार्य विषयों में से कम से कम तीन विषय पास किए हों। बोर्ड के इस फैसले से हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच परीक्षा को लेकर स्थिति साफ हो गई है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अनुसार, आवश्यक सुधार श्रेणी के तहत वे विद्यार्थी पात्र होंगे, जिन्होंने अंग्रेजी, गणित, हिंदी, सामाजिक विज्ञान और विज्ञान जैसे पांच अनिवार्य विषयों में से कम से कम तीन विषयों में सफलता हासिल की हो। ऐसे विद्यार्थियों को बाकी बचे दो विषयों में दूसरी परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। यदि विद्यार्थी दूसरी परीक्षा में दोनों विषयों में पास हो जाते हैं, तो उन्हें पूर्ण रूप से उत्तीर्ण घोषित किया जाएगा।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई विद्यार्थी दूसरी परीक्षा में केवल एक ही विषय में पास होता है, तो उसे कंपार्टमेंट श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं यदि विद्यार्थी दोनों विषयों में असफल रहता है, तो उसे अनिवार्य पुनरावृत्ति श्रेणी में शामिल किया जाएगा। यानी ऐसे विद्यार्थियों को अगली शैक्षणिक प्रक्रिया के तहत फिर से तैयारी करनी होगी।
बोर्ड की ओर से यह भी राहत दी गई है कि आवश्यक सुधार श्रेणी के विद्यार्थी पहले से पास किए गए तीन विषयों में से किसी एक विषय में अंक सुधार परीक्षा भी दे सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को अपने कुल अंक बेहतर करने का अवसर मिलेगा।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि वैकल्पिक सुधार श्रेणी उन विद्यार्थियों के लिए लागू होगी, जिन्होंने सभी अनिवार्य विषय पास कर लिए हैं लेकिन अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को पांच अनिवार्य विषयों में से अधिकतम तीन विषयों में सुधार परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी।
इसके अलावा जिन विद्यार्थियों का प्रथम परीक्षा परिणाम कंपार्टमेंट आया है, उन्हें कंपार्टमेंट श्रेणी के तहत दूसरी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी। बोर्ड का कहना है कि ड्यूल परीक्षा प्रणाली का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक अतिरिक्त अवसर देना है ताकि वे बिना पूरा शैक्षणिक वर्ष गंवाए अपने परिणाम में सुधार कर सकें।
शिक्षा बोर्ड के इस फैसले को विद्यार्थियों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे दूसरी परीक्षा को लेकर पात्रता और श्रेणियों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। अब विद्यार्थी तय नियमों के अनुसार अपनी तैयारी आगे बढ़ा सकेंगे।



