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हिमाचल में बिजली बिलों ने बढ़ाई टेंशन, किराएदारों के बिजली के बिल देखकर उड़े होश

हिमाचल में मई के बिजली बिलों ने उपभोक्ताओं को दिया बड़ा झटका
सुक्खू सरकार ने दो से अधिक मीटरों पर खत्म की बिजली सब्सिडी
किराए के मकानों में रहने वाले लाखों उपभोक्ता बिना सब्सिडी के भर रहे भारी बिल


हिमाचल प्रदेश में मई महीने के बिजली बिलों ने लाखों उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। खासकर शहरी क्षेत्रों में किराए के मकानों और कमरों में रहने वाले लोगों को इस बार भारी भरकम बिजली बिल थमाए गए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य सरकार द्वारा दो से अधिक बिजली मीटरों पर सब्सिडी खत्म करने का फैसला माना जा रहा है। इस निर्णय का सीधा असर करीब 3 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ा है, जिनमें बड़ी संख्या किराएदारों की है।

राज्य की Himachal Pradesh State Electricity Board Limited की नई व्यवस्था के अनुसार अब एक राशन कार्ड पर केवल दो मीटरों तक ही बिजली सब्सिडी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त मीटरों का बिल पूर्ण टैरिफ के हिसाब से बनाया जा रहा है। ऐसे में जिन मकान मालिकों ने किराएदारों के लिए अलग-अलग मीटर लगवा रखे हैं, वहां रहने वाले लोगों को अब बिना सब्सिडी के महंगे बिजली बिल भरने पड़ रहे हैं।

सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान कांग्रेस ने प्रदेश की जनता को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। हालांकि यह वादा अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। उल्टा अब स्थिति ऐसी बन गई है कि कई उपभोक्ताओं को कम बिजली खर्च करने के बावजूद भी पूरा बिल चुकाना पड़ रहा है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और इसे चुनावी वादों से पीछे हटना बताया जा रहा है।

सरकार के इस फैसले की सबसे बड़ी मार गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रही है। शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रहते हैं जो किराए के कमरों में जीवन यापन कर रहे हैं। मकान मालिकों के नाम पर लगे कई मीटरों के कारण किराएदार अब सब्सिडी से वंचित हो रहे हैं। दूसरी ओर जिन लोगों के अपने मकान हैं, उन्हें पहले की तरह सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। इसी वजह से किराएदारों और मकान मालिकों के बीच भी विवाद की स्थिति बन रही है।

ग्रामीण इलाकों में हालांकि अभी दो मीटर तक सब्सिडी जारी रहने से लोगों को राहत है, लेकिन शहरों और सेमी अर्बन क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच बिजली के भारी बिलों ने घरेलू बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

इसी बीच बिजली बोर्ड की KYC प्रक्रिया भी विवादों में आ गई है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उनके नाम पर ऐसे मीटर जोड़ दिए गए हैं जो उनके नहीं हैं। इसके चलते कई लोगों को उन मीटरों के बिल भी भेजे जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल वे नहीं कर रहे। इस गड़बड़ी के कारण कई उपभोक्ताओं को दो मीटरों पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

बिजली बोर्ड प्रबंधन ने माना है कि इस प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं। बोर्ड का कहना है कि उपभोक्ता संबंधित सब-डिवीजन कार्यालय में जाकर या विभाग की वेबसाइट के माध्यम से अपने रिकॉर्ड में सुधार करवा सकते हैं। हालांकि उपभोक्ताओं का आरोप है कि समस्या का समाधान तुरंत नहीं हो रहा और उन्हें लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

बिजली सब्सिडी और बढ़ते बिलों का यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी लेता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।