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हिमाचल में बदलने वाला है प्रशासनिक नक्शा, क्या कई तहसीलों और उपमंडलों का होगा विलय?

  • हिमाचल में प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित करने को कैबिनेट की मंजूरी
  • उपमंडल, तहसील और विकास खंडों की सीमाओं व संख्या की होगी समीक्षा
  • सरकारी खर्च कम करने और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर फोकस

हिमाचल प्रदेश सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में प्रदेश की प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए एक आयोग गठित करने को मंजूरी दी गई है। यह आयोग प्रदेश के उपमंडलों, विकास खंडों, तहसीलों और उप तहसीलों की सीमाओं और संख्या की व्यापक समीक्षा करेगा।

सरकार का मानना है कि पिछले वर्षों में कई प्रशासनिक इकाइयों का गठन राजनीतिक और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया था, लेकिन इससे सरकारी खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। कई क्षेत्रों में कम कार्यभार और सीमित संसाधनों के बावजूद अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयां संचालित की जा रही हैं। ऐसे में अब सरकार प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यावहारिक, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।

प्रदेश में वर्तमान समय में 12 जिले, 81 उपमंडल, 92 विकास खंड तथा 193 तहसीलें और उप तहसीलें संचालित हो रही हैं। आयोग इन सभी इकाइयों की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, दूरी, प्रशासनिक जरूरत, उपलब्ध संसाधन और वित्तीय बोझ का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर नई सीमाएं तय करने, इकाइयों के पुनर्गठन, विलय अथवा संख्या में कटौती से संबंधित सुझाव सरकार को दिए जाएंगे।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार जिन प्रशासनिक इकाइयों में अपेक्षित कार्यभार नहीं है या जहां पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां पुनर्गठन अथवा विलय पर विचार किया जा सकता है। वहीं दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्थाओं की सिफारिश भी संभव है।

सरकार का उद्देश्य अनावश्यक खर्चों में कटौती कर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। आयोग विभिन्न विभागों और जिलों से आंकड़े जुटाने के साथ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से भी सुझाव लेगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद अब जल्द ही आयोग के गठन की औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी।

कैबिनेट बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए परागपुर में एसडीएम कार्यालय खोलने को भी मंजूरी दी गई। इससे क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी और लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिलेगी।