➤ हिमाचल के चार नगर निगमों में महापौर पद पांच वर्षों तक रहेगा अनारक्षित
➤ सोलन, पालमपुर, मंडी और धर्मशाला नगर निगमों के लिए सरकार ने जारी की अधिसूचना
➤ मेयर पद के आरक्षण रोस्टर पर लंबे इंतजार के बाद खत्म हुई राजनीतिक अनिश्चितता
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों के बाद महापौर पदों को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों और इंतजार पर आखिरकार विराम लग गया है। राज्य सरकार ने बुधवार को बड़ा फैसला लेते हुए सोलन, पालमपुर, मंडी और धर्मशाला नगर निगम के महापौर पदों को आगामी पांच वर्षों के लिए अनारक्षित (जनरल) घोषित कर दिया है। इस संबंध में शहरी विकास विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।
नगर निगम चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद से ही सभी राजनीतिक दलों, निर्वाचित पार्षदों और संभावित मेयर उम्मीदवारों की नजरें आरक्षण रोस्टर पर टिकी हुई थीं। मेयर पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा, इस पर फैसला नहीं होने के कारण कई नेताओं और राजनीतिक दलों की रणनीति अधर में लटकी हुई थी। अब सरकार की अधिसूचना के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को प्रधान सचिव (शहरी विकास) देवेश कुमार ने रोस्टर से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने पर बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी गई। शहरी विकास विभाग ने इससे पहले प्रस्ताव तैयार कर विधि विभाग को भेजा था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और फाइल वापस आने के बाद सरकार ने अंतिम निर्णय लिया।
उल्लेखनीय है कि चारों नगर निगमों के चुनाव परिणाम पहले ही घोषित किए जा चुके हैं और कुल 63 वार्डों में नए पार्षद चुनकर आए हैं। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मेयर पद के आरक्षण को लेकर असमंजस बना हुआ था। कई संभावित उम्मीदवार यह तय नहीं कर पा रहे थे कि वे मेयर पद के लिए दावा पेश कर पाएंगे या नहीं। यही कारण था कि नगर निगमों में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई थीं।
सरकार की इस अधिसूचना के बाद अब मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। विशेषकर धर्मशाला, मंडी, पालमपुर और सोलन नगर निगमों में विभिन्न दलों और निर्दलीय पार्षदों के बीच समर्थन जुटाने की कवायद और तेज होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अनारक्षित श्रेणी घोषित होने से अब अधिक संख्या में दावेदार मैदान में उतरेंगे और मेयर चुनाव की प्रतिस्पर्धा और रोचक हो सकती है।
नगर निगम चुनावों के बाद प्रदेश में पहले ही राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई थीं। अब मेयर पदों के लिए आरक्षण रोस्टर स्पष्ट होने के बाद अगले कुछ दिनों में नगर निगमों के भीतर सत्ता संतुलन और राजनीतिक रणनीतियों की तस्वीर भी साफ होती नजर आएगी।



