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अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले आदित्य पंचतत्व में विलीन

अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले हमीरपुर के आदित्य शर्मा पंचतत्व में विलीन

इकलौते बेटे की पार्थिव देह से लिपटकर बिलखती रही मां, गांव में गम का माहौल

मर्चेंट नेवी में पहली नौकरी के कुछ ही महीनों बाद हादसे ने छीन लिया परिवार का सहारा


हमीरपुर जिले के बड़सर उपमंडल के गांव भालू में गुरुवार को माहौल पूरी तरह गमगीन रहा। अमेरिकी हमले में जान गंवाने वाले 23 वर्षीय आदित्य शर्मा का पूरे राजकीय सम्मान और नम आंखों के बीच अंतिम संस्कार किया गया।

बेटे आदित्य की पार्थिव देह देखकर बेसुध हुई मां को सांत्वना देते रिश्तेदार।

जैसे ही आदित्य की पार्थिव देह उनके पैतृक घर पहुंची, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। मां सुषमा लखनपाल बेटे के शव से लिपटकर फूट-फूट कर रो पड़ीं और बार-बार बेसुध होती रहीं। पिता राजेश शर्मा, दादी और अन्य परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था।

आदित्य शर्मा के घर पर उमड़ी भीड़।

अंतिम संस्कार के दौरान क्षेत्र के सैकड़ों लोग आदित्य को अंतिम विदाई देने पहुंचे। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों ने नम आंखों से आदित्य को श्रद्धांजलि अर्पित की और “आदित्य शर्मा अमर रहे” के नारों के बीच उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। आदित्य को उनके चचेरे भाई पार्थ ने मुखाग्नि दी।

आदित्य शर्मा की पार्थिव देह को शमशानघाट ले जाते हुए स्थानीय लोग।

आदित्य शर्मा की पार्थिव देह बुधवार रात को हमीरपुर पहुंची थी। विदेश में हुई औपचारिकताओं और अन्य प्रक्रियाओं के कारण शव को भारत लाने में समय लगा, जिसके चलते हादसे के नौवें दिन उनका अंतिम संस्कार हो सका। गुरुवार सुबह हमीरपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। परिजनों ने ओमान में पोस्टमार्टम करवाने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद यह प्रक्रिया भारत में पूरी की गई।

जानकारी के अनुसार 9 जून को होर्मुज क्षेत्र में हुए अमेरिकी हमले में आदित्य शर्मा की मौत हो गई थी। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार को उनके घर लौटने का इंतजार था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस घर में बेटे की वापसी की खुशियां मनाने की तैयारी थी, वहां अचानक मातम पसर गया।

आदित्य शर्मा के पिता राजेश शर्मा को सांत्वना देते हुए रिश्तेदार।

आदित्य शर्मा वर्ल्ड मैरिटाइम एनर्जी लिमिटेड के तेल टैंकर ‘एमटी सेत्तेबेल्लो’ पर बतौर डेक कैडेट कार्यरत थे। यह उनकी पहली नौकरी थी। उन्होंने जालंधर से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद चेन्नई से मर्चेंट नेवी का कोर्स किया और फिर स्कॉटलैंड से नॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। 24 नवंबर 2025 को उन्हें मर्चेंट नेवी में नौकरी मिली थी और परिवार को उनके उज्ज्वल भविष्य से बड़ी उम्मीदें थीं।

बताया जा रहा है कि हमले के दौरान जहाज पर सवार 21 भारतीय क्रू मेंबरों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन आदित्य समेत तीन भारतीय नागरिकों की जान नहीं बचाई जा सकी। इस दुखद घटना ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।

अंतिम संस्कार के दौरान डीसी हमीरपुर गंधर्व राठौड़ और एसडीएम नादौन सहित कई प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और इस कठिन समय में हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।