➤ सब्जी बेचने और ई-रिक्शा चलाने वाले झंडू कुमार ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया CWG 2026 का पहला पदक
➤ पोलियो से जूझकर पैरा पावरलिफ्टिंग में जीता ब्रॉन्ज, संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी
➤ कोविड में परिवार चलाने के लिए ई-रिक्शा चलाया, अब कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का बढ़ाया मान
नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पहला पदक जीतने वाले बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार आज देशभर के लिए प्रेरणा बन गए हैं। कभी परिवार का पेट पालने के लिए सड़क किनारे सब्जी बेचने और ई-रिक्शा चलाने वाले झंडू कुमार ने अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।
28 वर्षीय झंडू कुमार, जो बचपन से पोलियो से प्रभावित हैं, ने प्रतियोगिता में 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर 130.9 अंक हासिल किए। हालांकि उनका 196 किलोग्राम का अंतिम प्रयास सफल नहीं हो सका, लेकिन उनका प्रदर्शन उन्हें कांस्य पदक दिलाने के लिए पर्याप्त रहा। इस स्पर्धा में नाइजीरिया के इदरिस रिलुवान ने स्वर्ण और इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक जीता।
मेडल जीतकर सबसे पहले माता-पिता को किया फोन
ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद भावुक हुए झंडू कुमार ने कहा कि इस पल को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने सबसे पहले अपने माता-पिता को फोन कर यह खुशी साझा की। इसके बाद अपने बचपन के साथी और मार्गदर्शक गौतम को फोन कर जीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत के लिए पहला पदक जीतना उनके जीवन का सबसे गर्व का क्षण है।
सब्जी बेचने से शुरू हुआ संघर्ष
बिहार के नालंदा जिले के हरनौत के रहने वाले झंडू कुमार का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। उनके पिता सड़क किनारे सब्जियां बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। झंडू भी पिता का हाथ बंटाने के लिए सब्जी बेचते थे। कोविड-19 महामारी के दौरान जब हालात और मुश्किल हो गए, तब उन्होंने परिवार की आजीविका चलाने के लिए ई-रिक्शा चलाया।
खेल जारी रखने के लिए बेच दिया ई-रिक्शा
झंडू कुमार ने वर्ष 2017 में पैरा एथलेटिक्स से अपने खेल करियर की शुरुआत की। बाद में उनकी रुचि पावरलिफ्टिंग में बढ़ी और उन्होंने इसी खेल को अपना लक्ष्य बना लिया। आर्थिक तंगी इतनी थी कि 2023 में ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाने के लिए उन्हें अपना ई-रिक्शा भी बेचना पड़ा।
इसके बाद पैरालिंपिक पदक विजेता रजिंदर सिंह राहेलु की नजर उन पर पड़ी। उनके मार्गदर्शन में झंडू को गांधीनगर स्थित SAI नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण का मौका मिला, जहां से उनके करियर ने नई उड़ान भरी।
राष्ट्रीय रिकॉर्ड से लेकर कॉमनवेल्थ तक का सफर
झंडू कुमार ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में 205 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद खेलो इंडिया पैरा गेम्स में 206 किलोग्राम वजन उठाकर अपनी प्रतिभा साबित की। 2026 बीजिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन एंड ओशियाना चैंपियनशिप में भी उन्होंने कांस्य पदक जीते। अब उनका अगला लक्ष्य 2028 लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है।



