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विदेश से MBBS करने वाले छात्रों को बड़ी राहत, हिमाचल में अब सिर्फ एक साल की इंटर्नशिप; CM सुक्खू के निर्देश

कोविड काल में विदेश से MBBS करने वाले पात्र छात्रों को अब केवल एक साल की इंटर्नशिप करनी होगी
CM सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग को जल्द आदेश जारी कर औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए
सरकार ने छात्र हित में असमंजस खत्म कर समान परिस्थितियों वाले सभी पात्र विद्यार्थियों को राहत देने का फैसला लिया


शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने विदेश से MBBS की पढ़ाई करने वाले उन विद्यार्थियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है, जिनकी पढ़ाई कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन माध्यम से प्रभावित हुई थी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐसे पात्र विदेशी चिकित्सा स्नातकों (Foreign Medical Graduates) के लिए इंटर्नशिप की अवधि दो वर्ष के बजाय एक वर्ष करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय से लंबे समय से असमंजस और अनिश्चितता का सामना कर रहे कई छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है।

शनिवार को शिमला सचिवालय में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विदेश से MBBS कर लौटे छात्रों के साथ विस्तृत बैठक की। बैठक में छात्रों ने अपनी समस्याओं और इंटर्नशिप अवधि को लेकर सामने आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कोविड-19 महामारी जैसी असाधारण परिस्थितियों का नुकसान योग्य विद्यार्थियों को नहीं उठाना पड़ेगा और सरकार उनके साथ पूरी निष्पक्षता तथा संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करेगी।

बैठक में यह जानकारी सामने आई कि विदेश से मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की इंटर्नशिप अवधि को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। एक ही शैक्षणिक बैच के कुछ विद्यार्थियों को एक वर्ष की इंटर्नशिप की अनुमति मिल गई थी, जबकि कोविड काल में समान परिस्थितियों में पढ़ाई करने वाले अन्य विद्यार्थियों को दो वर्ष की इंटर्नशिप करने के निर्देश दिए गए थे। इससे छात्रों में असंतोष और असमानता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करने वाले विदेशी चिकित्सा स्नातकों के लिए Compensatory Training की अवधि तय करने का अधिकार राज्य सरकारों को दिया है। इसी अधिकार का उपयोग करते हुए हिमाचल सरकार ने पात्र विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप अवधि एक वर्ष निर्धारित करने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि इस निर्णय से संबंधित सभी आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर औपचारिक आदेश जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र छात्र को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और वे समय पर अपनी इंटर्नशिप शुरू या पूरी कर सकें।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से प्रभावित छात्रों के भविष्य को नई दिशा मिलेगी। लंबे समय से इंटर्नशिप अवधि को लेकर चल रही अनिश्चितता समाप्त होगी और योग्य विद्यार्थी बिना अतिरिक्त बाधाओं के अपने चिकित्सा पेशे में आगे बढ़ सकेंगे। यह निर्णय न केवल छात्र हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि राज्य सरकार की छात्र-केंद्रित और व्यावहारिक नीति का भी उदाहरण है।