➤ हिमाचल विधानसभा में प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार की जयंती पर श्रद्धांजलि समारोह आयोजित
➤ विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया बोले- सीमित संसाधनों में डॉ. परमार ने रखी विकास की मजबूत नींव
➤ मुख्यमंत्री सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित सभी दलों के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री एवं हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार की जयंती पर मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लाइब्रेरी हॉल में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद डॉ. परमार ने प्रदेश के विकास की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिसकी बदौलत आज हिमाचल देश के अग्रणी राज्यों में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जब हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ था, तब राज्य के सामने आर्थिक संसाधनों की भारी कमी थी और विकास की राह आसान नहीं थी। इसके बावजूद डॉ. वाईएस परमार ने अपनी दूरदर्शी सोच, मजबूत नेतृत्व और जनकल्याणकारी दृष्टिकोण से विकास की ऐसी आधारशिला रखी, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार ने केवल प्रदेश का निर्माण ही नहीं किया, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया।
कुलदीप सिंह पठानिया ने बताया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा वर्ष 1994 से डॉ. परमार की जयंती पर विशेष समारोह आयोजित करने की परंपरा निभा रही है। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को हिमाचल निर्माता के संघर्ष, विचारों और उनके ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराना है, ताकि युवा उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सकें।
श्रद्धांजलि समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, उपमुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, पूर्व विधायक तथा अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस वर्ष डॉ. परमार के परिवार के सदस्य समारोह में शामिल नहीं हो सके, क्योंकि उनके पैतृक गांव बागथन में भी उनकी जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार श्रीनिवास जोशी ने कहा कि डॉ. परमार ने हिमाचल को पिछड़ेपन से बाहर निकालने के लिए शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने प्रदेश के बजट का बड़ा हिस्सा शिक्षा के विस्तार पर खर्च किया, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों तक विद्यालय और शिक्षा की सुविधाएं पहुंच सकीं। उन्होंने कहा कि डॉ. परमार का मानना था कि शिक्षा ही प्रदेश के समग्र विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है।
उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. परमार सड़कों को विकास की रेखाएं मानते थे। यही कारण था कि उन्होंने सड़क निर्माण, पर्यटन, स्वास्थ्य और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। आज प्रदेश के अधिकांश गांव सड़क नेटवर्क से जुड़े हैं, जो उनकी दूरदर्शी सोच का परिणाम है।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी डॉ. वाईएस परमार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहचान और विकास की मजबूत नींव डॉ. परमार ने रखी थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इसकी शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई और उसे आकार देने में डॉ. परमार का कितना बड़ा योगदान रहा।
जयराम ठाकुर ने कहा कि अलग पहाड़ी राज्य के निर्माण के लिए डॉ. परमार ने लंबा संघर्ष किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद वह पैदल गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं सुनते थे और विकास की योजनाएं तैयार करते थे। उन्होंने याद दिलाया कि जब योजना आयोग के अधिकारियों ने उनसे प्रदेश की सबसे बड़ी आवश्यकता पूछी थी, तब उनका जवाब था— “सड़क, सड़क और सड़क।”
उन्होंने कहा कि आज हिमाचल की बढ़ती साक्षरता, मजबूत सड़क नेटवर्क, पेयजल सुविधाएं और आर्थिक प्रगति डॉ. परमार की दूरदर्शी सोच का परिणाम हैं। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में डॉ. परमार की जयंती का आयोजन पहले की तरह अधिक भव्य स्तर पर किया जाए तथा समारोह में प्रदर्शित होने वाली डॉक्यूमेंट्री में प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के योगदान को भी स्थान दिया जाए।
समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार के योगदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने और प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।



