➤ देश में पहली बार जीप योग्य और एंबुलेंस संपर्क सड़कों के लिए एक समान दिशा-निर्देश जारी
➤ दूरदराज गांवों तक सुरक्षित सड़क संपर्क और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार का फोकस
➤ पुरानी सड़कों का निरीक्षण, उन्नयन और प्रमाणन कर नियमित रखरखाव व्यवस्था में किया जाएगा शामिल
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रदेश के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षित सड़क संपर्क सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने जीप योग्य और एंबुलेंस संपर्क सड़कों के डिजाइन, निर्माण, प्रमाणन और रखरखाव के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यह व्यवस्था देश में अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा बढ़ाने और लोगों तक आवश्यक सेवाओं की पहुंच आसान बनाना है।
नई नीति के तहत ऐसी संपर्क सड़कों के निर्माण में अब एक समान इंजीनियरिंग मानकों का पालन अनिवार्य होगा। इन मार्गों का उपयोग जीप, एंबुलेंस और अन्य हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच पहले से अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगी।
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में सड़क की न्यूनतम चौड़ाई, सड़क की सतह की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था, रिटेनिंग वॉल, ब्रेस्ट वॉल, ढलानों की सुरक्षा, पैरापिट, क्रैश बैरियर तथा अन्य सड़क सुरक्षा उपायों से जुड़े स्पष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन मानकों का उद्देश्य सड़कों को अधिक मजबूत, सुरक्षित और लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाना है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सड़क यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और नई व्यवस्था इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में प्रदेश के कई हिस्सों में जीप योग्य सड़कें बिना किसी एक समान इंजीनियरिंग मानकों के बनाई गई थीं। इसके कारण अनेक मार्गों पर आवश्यक सुरक्षा सुविधाओं का अभाव रहा और उन्हें प्रमाणन तथा नियमित रखरखाव व्यवस्था में शामिल नहीं किया जा सका।
नई अधिसूचित नीति के तहत अब ऐसी सभी मौजूदा जीप योग्य सड़कों का तकनीकी निरीक्षण किया जाएगा। जहां आवश्यकता होगी, वहां सुरक्षा मानकों के अनुरूप उनका उन्नयन किया जाएगा। निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद ही इन मार्गों को प्रमाणित किया जाएगा और उसके बाद उन्हें राज्य की नियमित रखरखाव प्रणाली में शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संतुलित और समावेशी विकास के लिए मजबूत सड़क संपर्क बेहद जरूरी है। बेहतर सड़कें लोगों को अस्पतालों, स्कूलों, बाजारों और आपातकालीन सेवाओं तक शीघ्र पहुंच उपलब्ध कराती हैं। साथ ही पर्यटन, कृषि, बागवानी और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलती है। सरकार का मानना है कि इस नीति से विशेष रूप से पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।



