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हिमाचल के पर्वतारोहियों का कमाल: 6318 मीटर ऊंची रामजाक चोटी पर लहराया तिरंगा, मुश्किल हालात में हासिल की बड़ी सफलता

निरमंड की एल्टीट्यूड क्लाइंबर्स टीम ने 6,318 मीटर ऊंची रामजाक चोटी फतह की

तेज हवा, बर्फ, ऑक्सीजन की कमी और खराब मौसम के बीच चार पर्वतारोहियों ने लहराया तिरंगा

30 जुलाई से शुरू हुए अभियान में तीन दिन एडवांस कैंप में रुकने के बाद मिली सफलता


निरमंड (कुल्लू)। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के निरमंड की पर्वतारोहण टीम एल्टीट्यूड क्लाइंबर्स ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। टीम ने लाहौल स्थित 6,318 मीटर ऊंची रामजाक चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। खराब मौसम, तेज बर्फीली हवाओं, अत्यधिक ठंड और ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद चार सदस्यीय दल ने यह चुनौतीपूर्ण अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया।

यह अभियान 30 जुलाई को शुरू हुआ था। शुरुआती दिनों में लगातार खराब मौसम के कारण टीम को 5,750 मीटर की ऊंचाई पर बने एडवांस कैंप में लगातार तीन रातें बितानी पड़ीं। मौसम में सुधार होने के बाद पर्वतारोहियों ने अंतिम चढ़ाई शुरू की और कठिन चढ़ाई को पार करते हुए दोपहर करीब 1:30 बजे रामजाक चोटी के शिखर पर पहुंच गए।

शिखर पर पहुंचने के बाद टीम ने पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और सफलता का जश्न मनाया। मौसम को देखते हुए दल ने अधिक समय शिखर पर नहीं बिताया और तुरंत सुरक्षित वापसी शुरू कर दी। सभी सदस्य सकुशल आधार शिविर पहुंचे, जिसके बाद वे जिस्पा लौट आए।

इन पर्वतारोहियों ने किया अभियान सफल

इस अभियान में बाल कृष्ण ठाकुर, शुभम जगता, यशवेंद्र चौहान और रजत चौहान शामिल रहे। इनमें बाल कृष्ण ठाकुर निरमंड उपमंडल के पहले पर्वतारोही हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र में पर्वतारोहण की नई पहचान बनाई है।

पहले भी फतह कर चुकी है कई ऊंची चोटियां

एल्टीट्यूड क्लाइंबर्स टीम पिछले कई वर्षों से हिमालयी पर्वतारोहण और रेस्क्यू अभियानों में सक्रिय है। इससे पहले टीम ने 8 अगस्त 2025 को 6,791 मीटर ऊंचे लियो परग्याल शिखर और 4 अक्तूबर 2025 को 6,303 मीटर ऊंचे सीसीकेएन शिखर का भी सफल आरोहण किया था।

‘सफलता के लिए तैयारी और टीमवर्क सबसे जरूरी’

दल के सदस्य बाल कृष्ण ठाकुर ने कहा कि ऊंची चोटियों पर सफलता केवल शारीरिक क्षमता से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए कठिन तैयारी, नियमित प्रशिक्षण, धैर्य, सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता और मजबूत टीम भावना बेहद जरूरी होती है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय पूरी टीम के आपसी विश्वास और पर्वतारोहण के प्रति समर्पण को दिया।