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हिमाचल में क्लर्क और जेओए आईटी के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू, 30 सितंबर तक मांगा पूरा रिकॉर्ड

क्लर्क और जेओए आईटी के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू, 30 सितंबर तक रिकॉर्ड मांगा

दो वर्ष की लगातार संविदा सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी होंगे नियमितीकरण के पात्र

नियुक्ति आदेश से मेडिकल फिटनेस तक 12 दस्तावेज अनिवार्य, पात्र कर्मचारी सूची से न छूटे


शिमला। हिमाचल प्रदेश में अनुबंध आधार पर कार्यरत क्लर्क और जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के लिए बड़ी खबर है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने इन कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला उपनिदेशकों को निर्देश जारी कर उन कर्मचारियों का पूरा रिकॉर्ड भेजने को कहा है, जो 30 सितंबर 2026 तक दो वर्ष की लगातार संविदा सेवा पूरी कर लेंगे।

सरकार की नियमितीकरण नीति के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले क्लर्क और जेओए आईटी को नियमितीकरण का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर पात्र कर्मचारियों से संबंधित दस्तावेज जुटाकर उनका सत्यापन करने के बाद पूरा रिकॉर्ड उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजना होगा।

निदेशालय के निर्देश के बाद अब जिला स्तर पर ऐसे कर्मचारियों का रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नियमितीकरण के लिए पात्र कोई भी कर्मचारी सूची में शामिल होने से वंचित न रह जाए।

30 सितंबर 2026 तक दो साल की सेवा जरूरी

नियमितीकरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त दो वर्ष की निरंतर संविदा सेवा पूरी करना है। निदेशालय के अनुसार वे कर्मचारी इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे, जो 30 सितंबर 2026 तक अनुबंध आधार पर लगातार दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके होंगे।

जिला अधिकारियों को पात्र कर्मचारियों की सेवा अवधि से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। सेवा में किसी तरह का अंतर रहा है या नहीं, इसकी भी पुष्टि की जाएगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य नियमितीकरण के लिए पात्र कर्मचारियों की सही और सत्यापित सूची तैयार कर सरकार की नीति के अनुसार आगे की कार्रवाई करना है।

स्कूलों से लेकर कॉलेज, पुस्तकालय और एनसीसी कार्यालय तक का रिकॉर्ड होगा शामिल

उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि केवल किसी एक प्रकार के संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों का रिकॉर्ड नहीं भेजना है। जिला स्तर पर संचालित शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कॉलेजों, पुस्तकालयों और एनसीसी कार्यालयों में कार्यरत पात्र क्लर्क और जेओए आईटी की जानकारी भी इसमें शामिल की जाएगी।

जिला उपनिदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने अधीन आने वाले सभी संबंधित संस्थानों से कर्मचारियों का रिकॉर्ड प्राप्त कर उसकी जांच की जाए।

यदि किसी जिले में नियमितीकरण के लिए एक भी पात्र कर्मचारी नहीं है, तो संबंधित जिला अधिकारी को इसकी शून्य रिपोर्ट भी उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजनी होगी।

कोई पात्र कर्मचारी सूची से न छूटे, अधिकारियों को प्रमाणित करना होगा

निदेशालय ने जिला अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की है। अधिकारियों को यह प्रमाणित करना होगा कि उनके जिले में नियमितीकरण के लिए पात्र कोई भी क्लर्क या जेओए आईटी कर्मचारी सूची से बाहर नहीं रह गया है

इससे जिला स्तर पर तैयार होने वाली सूची की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर रहेगी। कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद ही उनका नाम नियमितीकरण के लिए आगे भेजा जाएगा।

इस निर्देश के बाद पात्र कर्मचारियों में नियमितीकरण को लेकर उम्मीद बढ़ी है। अब संबंधित जिलों में दस्तावेज जुटाने और सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

नियमितीकरण के लिए 12 दस्तावेज अनिवार्य

उच्च शिक्षा निदेशालय ने नियमितीकरण के लिए 12 प्रकार के दस्तावेज अनिवार्य किए हैं। पात्र कर्मचारियों को अपनी नियुक्ति और सेवा से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे।

इनमें नियुक्ति आदेश और भर्ती का माध्यम प्रमुख दस्तावेज हैं। इसके अलावा यदि किसी कर्मचारी की पुनर्नियुक्ति हुई है या सेवा समाप्ति का कोई आदेश जारी हुआ है तो उसकी जानकारी और संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे।

कर्मचारियों को अपनी शैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्र, हिमाचली बोनाफाइड प्रमाणपत्र और टाइप टेस्ट में उत्तीर्ण होने का प्रमाण भी देना होगा।

इसके साथ ही चरित्र प्रमाणपत्र, कार्य एवं आचरण प्रमाणपत्र और आरक्षण श्रेणी प्रमाणपत्र भी अनिवार्य दस्तावेजों में शामिल हैं।

सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में दो वर्ष की निरंतर सेवा का प्रमाणपत्र शामिल है। इसके अलावा कर्मचारी को अपना नवीनतम मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होगा।

दस्तावेजों के सत्यापन के बाद भेजा जाएगा रिकॉर्ड

निदेशालय के निर्देश के अनुसार संबंधित कर्मचारियों से दस्तावेज एकत्र करने के बाद जिला स्तर पर उनका सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन में कर्मचारी की नियुक्ति, भर्ती प्रक्रिया, शैक्षणिक योग्यता, सेवा अवधि और अन्य पात्रताओं की जांच की जाएगी।

सभी आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र कर्मचारियों का रिकॉर्ड उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजा जाएगा। इसके आधार पर नियमितीकरण की आगामी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

निदेशालय ने जिलों को इस प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरतने को कहा है, ताकि पात्र कर्मचारी का नाम छूटे नहीं और अपात्र कर्मचारी का नाम सूची में शामिल न हो।

प्राथमिक शिक्षकों का क्रमिक अनशन 13वें दिन भी जारी

इसी बीच शिक्षा विभाग से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण मामला भी सामने आया है। प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ का स्कूल शिक्षा निदेशालय शिमला के बाहर क्रमिक अनशन शुक्रवार को 13वें दिन भी जारी रहा।

संघ ने कहा कि शिक्षकों की न्यायोचित मांगों को लेकर शुरू किया गया आंदोलन पूरे जोश, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। संघ का कहना है कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

क्रमिक अनशन के 13वें दिन जिला किन्नौर इकाई के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें जिला अध्यक्ष सुरेंद्र नेगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश, महासचिव संजय रापा, कोषाध्यक्ष श्रवण नेगी, महालेखाकार सुरजीत सिंह और पूह खंड के उपाध्यक्ष गोबिंद सिंह शामिल रहे।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक वर्ग लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

11 जुलाई से शुरू हुआ था आंदोलन

प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुसार आंदोलन की शुरुआत 11 जुलाई 2026 को बनखंडी से न्याय यात्रा के साथ हुई थी। यह न्याय यात्रा शिमला पहुंची, जिसके बाद शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाया।

इसके बाद 26 जुलाई को चौड़ा मैदान शिमला में विशाल धरना आयोजित किया गया। इसी दौरान क्रमिक अनशन शुरू किया गया, जो शुक्रवार को 13वें दिन भी जारी रहा।

शिक्षक संघ का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से जारी रखा जाएगा। संघ ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से शिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग दोहराई है।

एक ओर अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू होने से क्लर्क और जेओए आईटी कर्मचारियों में उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर प्राथमिक शिक्षकों का आंदोलन भी जारी है। अब दोनों मामलों में सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर कर्मचारियों और शिक्षकों की नजर बनी हुई है।