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मेरिट पर नियुक्त वन मित्रों का मानदेय बढ़ेगा, वन महोत्सव पर सीएम सुक्खू ने की घोषणा

वन मित्रों का मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने की घोषणा
सीएम सुक्खू बोले- वन संरक्षण और पौधरोपण में वन मित्रों की अहम भूमिका
नालागढ़-बद्दी जमीन आवंटन और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार का विपक्ष पर निशाना


बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में वन संरक्षण और पौधरोपण अभियान से जुड़े वन मित्रों के लिए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बड़ी घोषणा की है। शुक्रवार को बिलासपुर के निहारी में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव एवं पौधरोपण कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरिट के आधार पर नियुक्त वन मित्रों के मानदेय को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने पौधरोपण कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिमाचल की पहचान उसके घने जंगलों, प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ पर्यावरण से है। ऐसे में प्रदेश के वन क्षेत्रों को सुरक्षित रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।

वन संरक्षण में वन मित्रों की भूमिका अहम

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन मित्र प्रदेश में वन संरक्षण और पौधरोपण अभियान को जमीन पर प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार ने उनकी जिम्मेदारियों और योगदान को ध्यान में रखते हुए मानदेय बढ़ाने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल पौधे लगा देना पर्याप्त नहीं है। लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। यही कारण है कि पौधरोपण को महज एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम के बजाय जन अभियान का रूप देने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि समाज पौधरोपण के साथ उसकी देखभाल को भी अपनी जिम्मेदारी समझे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ी पर्यावरण संरक्षण की जरूरत

सीएम सुक्खू ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों को भी पौधरोपण अभियानों से जोड़ने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों और युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

प्रदेशभर में वन महोत्सव के तहत अलग-अलग स्थानों पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ जंगलों की अहमियत भी समझाई जाएगी।

सरकार ईमानदारी और पारदर्शिता से काम कर रही : सुक्खू

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सरकार की कार्यप्रणाली का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार चुनौतियों से लड़ना जानती है और ईमानदारी एवं पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि संघर्ष से निकलकर आने वाला व्यक्ति आम जनता की परेशानियों और समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकता है। सरकार का प्रयास है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम किया जाए और प्रदेश के लोगों को योजनाओं का लाभ प्रभावी तरीके से मिले।

नालागढ़-बद्दी में जमीन आवंटन को लेकर विपक्ष पर निशाना

वन महोत्सव कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नालागढ़-बद्दी क्षेत्र में उद्योगपतियों को जमीन आवंटित किए जाने के मुद्दे पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये की जमीन उद्योगपतियों को दे दी गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को जेल भेजने में सरकार पीछे नहीं हटेगी।

हालांकि, इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का जवाब इस वक्त सामने नहीं है। मुख्यमंत्री ने मंच से सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई।

भाजपा पर भी मुख्यमंत्री ने साधा निशाना

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस दौरान भाजपा पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है और दीपकमल में बैठे कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने बिलासपुर से जुड़े भाजपा विधायकों और भाजपा सांसद को भी निशाने पर लिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आपदा के समय प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष पर्याप्त मजबूती से नहीं उठाया गया।

मुख्यमंत्री के इन बयानों से वन महोत्सव का कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ-साथ प्रदेश की राजनीतिक बहस का मंच भी बन गया। कार्यक्रम में पौधरोपण और वन संरक्षण के महत्व पर जोर देने के साथ सरकार की नीतियों और विपक्ष पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी बात रखी।

पौधरोपण को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में जंगल केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि जल स्रोतों, जैव विविधता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी सीधे जुड़े हैं। ऐसे में वन संरक्षण की जिम्मेदारी को सरकारी विभागों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों तक पहुंचाने पर मुख्यमंत्री ने जोर दिया।

वन मित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी की घोषणा को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। अब मेरिट के आधार पर नियुक्त वन मित्रों को पहले की तुलना में 2 हजार रुपये अधिक मानदेय मिलेगा।