➤ पीएम राहत योजना के तहत 375 मामलों के साथ हिमाचल देश में 10वें स्थान पर
➤ 355 मामलों को इलाज की मंजूरी मिली, पंजाब में 27 और उत्तराखंड में सिर्फ 16 मामले दर्ज
➤ पहाड़ी चुनौतियों के बावजूद घायलों को समय पर उपचार दिलाने में हिमाचल का प्रदर्शन बेहतर
शिमला। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को हादसे के बाद महत्वपूर्ण गोल्डन आवर में उपचार उपलब्ध कराने के लिए लागू केंद्र सरकार की पीएम राहत योजना के क्रियान्वयन में हिमाचल प्रदेश ने बेहतर प्रदर्शन किया है। योजना के शुरुआती आंकड़ों में हिमाचल ने पड़ोसी राज्यों पंजाब और उत्तराखंड को पीछे छोड़ दिया है।
13 फरवरी 2026 से लागू इस योजना के 31 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में कुल 375 मामले दर्ज हुए। इनमें से 355 मामलों को इलाज के लिए मंजूरी दी गई है। इन आंकड़ों के आधार पर हिमाचल देशभर में 10वें स्थान पर रहा।
हिमाचल के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश की पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई इलाकों से अस्पतालों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण रहता है। इसके बावजूद दुर्घटना पीड़ितों के उपचार को योजना के तहत मंजूरी दिलाने में राज्य ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों में योजना के तहत दर्ज मामलों और स्वीकृत उपचार में काफी अंतर सामने आया है।
उत्तर प्रदेश 887 मामलों के साथ देश में चौथे स्थान पर है। इनमें 679 मामलों को उपचार की मंजूरी मिली। जम्मू-कश्मीर में 749 मामले दर्ज हुए और 680 मामलों को मंजूरी मिली। वहीं हरियाणा में 492 मामले दर्ज हुए, जिनमें 431 को उपचार की स्वीकृति मिली।
हिमाचल प्रदेश 375 मामलों के साथ देश में 10वें स्थान पर रहा। राज्य में दर्ज मामलों में से 355 को उपचार की मंजूरी मिली।
पंजाब और उत्तराखंड से काफी आगे हिमाचल
पड़ोसी राज्यों की तुलना करें तो पंजाब में योजना के तहत सिर्फ 27 मामले दर्ज हुए। इनमें केवल पांच मामलों को उपचार की मंजूरी मिली।
वहीं उत्तराखंड में 16 मामले दर्ज किए गए और सात मामलों को उपचार की स्वीकृति मिली। योजना के तहत मामलों की संख्या में उत्तराखंड देश में 24वें स्थान पर रहा।
अन्य पड़ोसी क्षेत्रों की बात करें तो चंडीगढ़ में 20 मामले दर्ज हुए, जिनमें 15 को मंजूरी मिली। लद्दाख में 14 मामले सामने आए और छह मामलों को उपचार की स्वीकृति मिली।
इन आंकड़ों से साफ है कि योजना के शुरुआती महीनों में हिमाचल ने अपने पड़ोसी राज्यों पंजाब और उत्तराखंड की तुलना में कहीं अधिक दुर्घटना मामलों को योजना के दायरे में लाकर उपचार की मंजूरी दिलाई।
सात मामले समय पर पुलिस जवाब नहीं मिलने से हुए डिस्चार्ज
योजना के तहत सभी मामलों को उपचार की मंजूरी नहीं मिल सकी। आंकड़ों के अनुसार सात मामले ऐसे रहे, जिन्हें पुलिस की ओर से निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने के कारण योजना से डिस्चार्ज कर दिया गया।
इसके अलावा 13 मामलों को पुलिस ने जानलेवा स्थिति नहीं होने के कारण योजना के लिए अपात्र पाया। यानी इन मामलों में योजना के तहत उपचार की पात्रता निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी नहीं हुई।
कुल आंकड़ों को देखें तो हिमाचल में योजना के तहत दर्ज 375 मामलों में से 355 को उपचार की मंजूरी मिलना राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटना के बाद अस्पताल तक पहुंच और समय पर उपचार उपलब्ध कराने की चुनौती को देखते हुए यह आंकड़ा राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था और योजना के क्रियान्वयन की स्थिति को दर्शाता है।



