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हिमाचल में 45 मिनट के भीतर भूकंप के दो झटके, कांगड़ा-चंबा में दहशत; दोनों की गहराई 5 किलोमीटर

➤ 45 मिनट के भीतर कांगड़ा-चंबा में 3.6 और 4.0 तीव्रता के दो भूकंप

➤ कम गहराई पर केंद्र होने से लोगों ने महसूस किए तेज झटके, घर-दुकान छोड़कर बाहर निकले लोग

➤ फिलहाल जान-माल और संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं, प्रशासन ने सतर्क रहने की अपील की


हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और चंबा जिलों में मंगलवार शाम 45 मिनट के भीतर भूकंप के दो झटके महसूस किए गए। लगातार दो बार धरती हिलने से इलाके में दहशत फैल गई और लोग घबराकर अपने घरों, दफ्तरों और दुकानों से बाहर निकलकर खुले मैदानों की तरफ चले गए। पहला झटका शाम 6:54 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 3.6 रही, जबकि दूसरा झटका शाम 7:40 बजे आया और इसकी तीव्रता 4.0 दर्ज की गई। दोनों ही भूकंपों की गहराई जमीन से सिर्फ 5 किलोमीटर नीचे थी। भूकंप की गहराई कम होने के कारण लोगों को दोनों झटके काफी जोरदार और डरावने महसूस हुए।

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार शाम आए दोनों भूकंपों में पहला झटका 6:54 बजे आया। इसका केंद्र धर्मशाला के पास बताया गया और इसकी तीव्रता 3.6 दर्ज की गई। इसकी गहराई 5 किलोमीटर थी। इसके करीब 45 मिनट बाद शाम 7:40 बजे दूसरा भूकंप आया। इसका केंद्र कांगड़ा क्षेत्र में रहा और इसकी तीव्रता 4.0 दर्ज की गई। दूसरे भूकंप की गहराई भी 5 किलोमीटर ही रही।

45 मिनट में दो झटकों से घबराए लोग

लगातार दो भूकंप आने के कारण कांगड़ा और चंबा के इलाकों में लोगों के बीच अचानक डर का माहौल बन गया। पहला झटका महसूस होने के बाद लोग संभल ही रहे थे कि करीब 45 मिनट बाद फिर से धरती हिलने लगी। इससे लोगों की चिंता और बढ़ गई।

कई लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों, दफ्तरों और दुकानों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की तरफ चले गए। कम गहराई पर भूकंप का केंद्र होने के कारण झटके लोगों को अपेक्षाकृत अधिक तेज महसूस हुए।

दोनों भूकंपों की टाइमिंग और तीव्रता

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के मुताबिक दोनों झटकों का विवरण इस प्रकार है।

समय केंद्र तीव्रता गहराई
6:54 बजे शाम धर्मशाला के पास 3.6 5 किलोमीटर
7:40 बजे शाम कांगड़ा क्षेत्र 4.0 5 किलोमीटर

दोनों भूकंपों की गहराई 5 किलोमीटर रही। यही वजह रही कि लोगों को धरती में हुई हलचल के झटके स्पष्ट रूप से महसूस हुए।

जान-माल के नुकसान की खबर नहीं

गनीमत रही कि मंगलवार शाम आए इन दोनों भूकंपों से अभी तक किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। संपत्तियों या इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की भी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन की ओर से लगातार जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।

दो भूकंपों के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

बेहद संवेदनशील ‘सीस्मिक जोन 5’ में आता है इलाका

कांगड़ा, धर्मशाला और चंबा का क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह पूरा इलाका अति-संवेदनशील ‘सीस्मिक जोन 5’ के अंतर्गत आता है।

भूवैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र के नीचे स्थित टेक्टोनिक प्लेटों में लगातार होने वाली हलचल और दबाव के कारण इस बेल्ट में छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। इसी संवेदनशीलता के कारण यहां आने वाली भूगर्भीय हलचल को लेकर प्रशासन और विशेषज्ञों की नजर बनी रहती है।

प्रशासन अलर्ट, अफवाहों से बचने की अपील

लगातार भूकंप के झटके महसूस होने के बाद हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन की टीमें अलर्ट मोड पर आ गई हैं। प्रशासन की ओर से सभी उपमंडलों से क्षेत्र की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।

अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। लोगों से संयम बनाए रखने और सतर्क रहने को कहा गया है। फिलहाल दोनों भूकंपों के बाद किसी तरह के जान-माल या संपत्ति के नुकसान की सूचना नहीं है।