Follow Us:

राजीव गांधी की दूरदर्शी सोच को आगे बढ़ाने का दावा, मुख्यमंत्री सुक्खू ने गिनाईं सरकार की प्राथमिकताएं

राजीव गांधी की सोच से शिक्षा और प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने का दावा

भाजपा के बदले की भावना के आरोपों को सुक्खू ने नकारा, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का किया दावा

मुख्यमंत्री बोले- मौजूदा सरकार के कार्यकाल में कोई पेपर लीक नहीं, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर


शिमला। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राजीव गांधी की दूरदर्शी सोच, आधुनिक दृष्टिकोण और नीतियां आज भी देश और प्रदेश के लिए मार्गदर्शक हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से राजीव गांधी की जयंती को सद्भावना दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया और देश की एकता, अखंडता तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में उनके योगदान को याद किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके कार्यकाल में लोकतंत्र और युवाओं की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। उन्होंने मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे देश के करोड़ों युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सीधे भाग लेने का अवसर मिला।

उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में राजीव गांधी की भूमिका का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार आज हिमाचल प्रदेश की पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी करीब 54 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो ग्रामीण लोकतंत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

68 राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों के जरिए शिक्षा में बदलाव का दावा

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में करीब 68 राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इन संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से लैस गुणवत्तापूर्ण सरकारी विद्यालयों के रूप में विकसित करना है।

उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में सरकारी स्कूलों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने पर भी सरकार का जोर रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी का सपना था कि ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों को भी बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

सुक्खू ने कहा कि इसी सोच का एक उदाहरण जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना थी, जिनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाए गए। हिमाचल सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए डे-बोर्डिंग स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान दे रही है।

प्राकृतिक खेती को लेकर सरकार की योजना, किसानों को तय मूल्य देने का दावा

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की राजीव गांधी प्राकृतिक खेती योजना को किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को गेहूं के लिए 80 रुपये प्रति किलो, मक्की के लिए 50 रुपये प्रति किलो, अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलो और हल्दी के लिए लगभग 150 रुपये प्रति किलो का मूल्य दिया जा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना राज्य सरकार की पहल है और केंद्र सरकार की किसी योजना का हिस्सा नहीं है। हमीरपुर दौरे का जिक्र करते हुए सुक्खू ने कहा कि सरकार ने किसानों से 80 रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं खरीदा और करीब 23 लाख रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा करवाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्राकृतिक खेती से संबंधित उत्तर भारत की पहली टेस्टिंग लैब हमीरपुर में स्थापित की गई है। इस प्रयोगशाला में कृषि उत्पादों की वैज्ञानिक आधार पर जांच की जाएगी, जिससे प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणिकता को मजबूत किया जा सके।

दिल्ली जाकर हिमाचल के लंबित अधिकारों की पैरवी करेंगे सुक्खू

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी विभिन्न राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर रणनीति तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र के बाद वह दिल्ली जाएंगे और हिमाचल प्रदेश के लंबित वित्तीय तथा अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएंगे।

सुक्खू ने BBMB और किशाऊ बांध से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि इन मामलों में फैसला हिमाचल प्रदेश के पक्ष में आता है तो प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 1,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पिछले करीब 15 वर्षों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। सरकार ने इन मामलों की कानूनी पैरवी के लिए वरिष्ठ वकीलों की टीम भी तैयार की है। उन्होंने संकेत दिया कि प्रदेश अपने हितों से जुड़े मामलों को अब मजबूती से कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाएगा।

मानसून सत्र में विपक्ष को तथ्यों के साथ बहस की चुनौती

विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों में यह पहला अवसर है जब मानसून सत्र 10 दिनों तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष कई बार सदन में गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय वॉकआउट की राजनीति करता है।

सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित भाजपा विधायकों से आग्रह किया कि वे तथ्यों और दस्तावेजों के साथ सदन में आएं। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और उसके पास कई मामलों से जुड़े दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित व्हाइट पेपर के माध्यम से भी सरकार कई महत्वपूर्ण तथ्यों को जनता के सामने रखने की तैयारी कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि विधानसभा सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

बदले की भावना से कार्रवाई के भाजपा के आरोपों को मुख्यमंत्री ने किया खारिज

भाजपा की ओर से लगाए जा रहे राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से कार्रवाई के आरोपों को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि प्रदेश की संपदा, संसाधनों और सार्वजनिक हितों की रक्षा करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने प्रदेश को नुकसान पहुंचाया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई केवल उसकी राजनीतिक पहचान देखकर नहीं रोकी जा सकती। उन्होंने कहा कि कई मामलों में जांच चल रही है और आने वाले समय में जांच से जुड़े और दस्तावेज सामने आ सकते हैं।

भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और डॉ. जनक राज को विजिलेंस द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने के संदर्भ में भी मुख्यमंत्री ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां अपने स्तर पर मामलों की जांच कर रही हैं और सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेगी।

सुक्खू ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश में भ्रष्टाचार को समाप्त करना और सरकारी संसाधनों की सुरक्षा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताना उचित नहीं है, यदि जांच किसी मामले के तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही हो।

हिम केयर को लेकर मुख्यमंत्री का तीखा बयान, अनियमितताओं पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने हिम केयर योजना को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। भाजपा की ओर से सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों के जवाब में उन्होंने योजना के तहत सामने आई कथित अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्थाओं में गंभीर गलतियां हुई हैं।

इसी दौरान मुख्यमंत्री ने तीखे अंदाज में टिप्पणी की कि “हिम केयर में मर्दों की बच्चेदानी के कर दिए ऑपरेशन”। यह बयान योजना में सामने आई कथित गड़बड़ियों और रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों की ओर संकेत करते हुए दिया गया। हालांकि इस तरह के दावे को संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री का कहना था कि सरकार स्वास्थ्य योजनाओं में अनियमितताओं को नजरअंदाज करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि जिन मामलों में सरकारी धन या व्यवस्था का दुरुपयोग हुआ है, वहां तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया और वेब पोर्टलों से तथ्य आधारित रिपोर्टिंग की अपील

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और वेब पोर्टलों पर प्रसारित होने वाली खबरों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए।

सुक्खू ने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी सूचना को तेजी से प्रसारित किया जा सकता है, लेकिन इसकी सत्यता की जांच करना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कथित फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं को लेकर चिंता जाहिर की।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हर एफआईआर सरकार की ओर से दर्ज नहीं करवाई जाती। कानून के तहत आम नागरिक भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं और पुलिस उस शिकायत के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।

उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ती ब्लैकमेलिंग की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को धमकाने या दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का दावा, कर्मचारी चयन आयोग को भंग करने का जिक्र

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पेपर लीक मामलों में कड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अनियमितताओं के बाद हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग, हमीरपुर को भंग किया गया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने किसी भी दबाव के आगे झुकने के बजाय भर्ती व्यवस्था में सुधार को प्राथमिकता दी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर भर्तियां की जा रही हैं और दिसंबर में भर्ती प्रक्रिया तथा नियुक्तियों से जुड़ा पूरा ब्योरा जनता के सामने रखा जाएगा।

सुक्खू ने दावा किया कि उनकी सरकार के कार्यकाल में हाल की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए लगातार व्यवस्था में बदलाव कर रही है।

लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों के अंक मेरिट में शामिल होंगे

मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में किए जा रहे बदलाव की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों के अंक अंतिम मेरिट में शामिल किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के अनुसार इस व्यवस्था से योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी और सिफारिश तथा पक्षपात की गुंजाइश कम होगी। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया को केवल परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय उम्मीदवार के समग्र प्रदर्शन को ध्यान में रखा जाएगा।

सुक्खू ने बताया कि यही व्यवस्था डॉक्टरों समेत अन्य भर्तियों में भी लागू की गई है। सरकार का दावा है कि इससे चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा और योग्य उम्मीदवारों को अपनी क्षमता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

राजीव गांधी की जयंती पर सरकार की नीतियों और राजनीतिक मुद्दों का मिला संदेश

राजीव गांधी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुक्खू ने जहां पूर्व प्रधानमंत्री की नीतियों और दूरदर्शी सोच को याद किया, वहीं अपनी सरकार की शिक्षा, प्राकृतिक खेती, भर्ती, भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई और हिमाचल के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से सामने रखा।

मुख्यमंत्री के बयानों से साफ है कि आने वाले विधानसभा मानसून सत्र में भर्ती, भ्रष्टाचार, सरकारी योजनाओं में कथित अनियमितता, हिमाचल के वित्तीय अधिकार और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं। सरकार जहां अपने कामकाज और फैसलों को जनता के सामने रखने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष की ओर से इन दावों पर किस तरह पलटवार किया जाता है, इस पर भी राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।