➤ वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष-विपक्ष आमने-सामने, सदन में जमकर नारेबाजी
➤ हंगामा बढ़ा तो स्पीकर ने विधानसभा की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित की
➤ राष्ट्रगीत विवाद के साथ बेरोजगारी पर भाजपा का सरकार को घेरने का अभियान तेज
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत शुक्रवार को तीखे राजनीतिक टकराव के साथ हुई। सदन की कार्यवाही के पहले ही दिन वंदे मातरम् को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए। राष्ट्रगीत नहीं गाए जाने के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों ने सदन में खड़े होकर विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी। जवाब में सत्ता पक्ष के सदस्य भी नारेबाजी करने लगे।

देखते ही देखते विधानसभा का माहौल इतना गरमा गया कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो गया। स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने सदन की कार्यवाही शनिवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
सदन के भीतर हंगामे के बाद विधानसभा परिसर के बाहर भी दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी का सिलसिला जारी रहा। सत्ता पक्ष ने भाजपा पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगाते हुए विरोध जताया।

राष्ट्रगान से हुई शुरुआत, वंदे मातरम् को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके बाद वंदे मातरम् नहीं गाए जाने को लेकर विपक्षी सदस्य नाराज हो गए।
विपक्ष का तर्क था कि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत को लेकर नया प्रावधान किया गया है, जिसके तहत सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राष्ट्रीय गीत से किए जाने की बात कही गई है। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि विधानसभा में भी इस व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए और सदन की शुरुआत वंदे मातरम् से होनी चाहिए।
इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी सदस्य सदन में खड़े हो गए और विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी इसका जवाब नारेबाजी से दिया। कुछ ही देर में दोनों पक्षों के विधायक आमने-सामने आ गए और सदन का माहौल पूरी तरह राजनीतिक टकराव में बदल गया।

स्पीकर ने समझाया नियम, कहा- समापन पर गाया जाएगा राष्ट्रगीत
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने विपक्षी सदस्यों को शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय गीत को लेकर बनाया गया नया प्रावधान सरकारी कार्यक्रमों से संबंधित है और यह विधानसभा की कार्यवाही पर सीधे लागू नहीं होता।
अध्यक्ष के अनुसार हिमाचल विधानसभा में सदन की शुरुआत राष्ट्रगान से करने की परंपरा रही है, जबकि कार्यवाही के समापन पर राष्ट्रगीत गाया जाता है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के समापन पर राष्ट्रगीत गाया जाएगा।
स्पीकर की ओर से व्यवस्था स्पष्ट किए जाने के बावजूद विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और विरोध जारी रखा। नारेबाजी बढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया।
पहले दिन ही सदन स्थगित, बाहर भी जारी रहा राजनीतिक प्रदर्शन
हंगामा लगातार बढ़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करने का फैसला लेना पड़ा। इस तरह मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला।
कार्यवाही स्थगित होने के बाद भी राजनीतिक तापमान कम नहीं हुआ। विधानसभा परिसर के बाहर दोनों पक्षों के विधायक अपने-अपने मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए।
कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अगुवाई में प्रदर्शन किया और भाजपा पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया। इस दौरान कांग्रेस की ओर से भाजपा के खिलाफ ‘चंदा चोर’ और ‘राम के नाम पर खा गए चंदा’ जैसे नारे लगाए गए।
दूसरी ओर भाजपा विधायकों ने कांग्रेस सरकार पर वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
इस घटनाक्रम ने मानसून सत्र की शुरुआत को पूरी तरह राजनीतिक बना दिया है और आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे के और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।
रोजगार के मुद्दे पर पहले ही दिन भाजपा का आक्रोश प्रदर्शन
वंदे मातरम् विवाद से पहले ही भाजपा ने विधानसभा परिसर में बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया और आक्रोश रैली निकालकर प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के चुनावी वादे को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरा।
भाजपा पहले ही संकेत दे चुकी थी कि मानसून सत्र में बेरोजगारी उसके प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगी। पार्टी की ओर से इस विषय पर चर्चा की मांग को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी भी की गई थी।
भाजपा का कहना है कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार देना कांग्रेस के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल था और सरकार को सदन में यह बताना चाहिए कि अब तक इस दिशा में क्या काम हुआ है।
रणधीर शर्मा बोले- हर साल एक लाख नौकरी का किया था वादा
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान हर साल एक लाख नौकरियां और पांच साल में पांच लाख रोजगार देने का वादा किया था।
उनका कहना था कि पहली कैबिनेट बैठक में सरकारी नौकरी देने का वादा भी कांग्रेस के प्रमुख चुनावी आश्वासनों में शामिल था। लेकिन सरकार के पौने चार साल के कार्यकाल में इस दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ।
रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश के युवा रोजगार के लिए परेशान हैं और सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। उनके मुताबिक सरकारी भर्तियों की रफ्तार पर्याप्त नहीं है और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर भी अपेक्षा के अनुरूप उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
भाजपा का दावा- पौने चार साल में कुछ हजार युवाओं को ही रोजगार
भाजपा विधायक ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के पौने चार साल के कार्यकाल में केवल कुछ हजार युवाओं को ही नौकरियां मिल पाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार पाने वालों में भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां नियमित सरकारी रोजगार के बजाय आउटसोर्सिंग या विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हुई हैं।
भाजपा का कहना है कि सरकार को विधानसभा में यह स्पष्ट करना चाहिए कि चुनाव के समय किए गए रोजगार संबंधी वादों में से कितने पूरे हुए हैं और अब तक कितने युवाओं को स्थायी एवं नियमित रोजगार दिया गया है।
हालांकि, ये आंकड़े और आरोप भाजपा की ओर से लगाए गए हैं। इन पर सरकार की ओर से सदन में विस्तृत जवाब आना अभी बाकी है।
बेरोजगारी पर सरकार से हिसाब मांगने की तैयारी
भाजपा के अनुसार बेरोजगारी केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि हिमाचल के हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। पार्टी का कहना है कि युवाओं को स्थायी और नियमित रोजगार देने के वादे पर सरकार को विधानसभा के भीतर जवाब देना चाहिए।
आने वाले दिनों में सदन में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने की संभावना है। भाजपा चुनावी वादों, भर्तियों की स्थिति और रोजगार सृजन के आंकड़ों को लेकर सरकार से जवाब मांग सकती है।
वहीं, मानसून सत्र के पहले दिन ही वंदे मातरम् विवाद ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग आरोपों के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि शनिवार को सदन की कार्यवाही किस तरह आगे बढ़ती है।
पहले दिन के हंगामे ने तय कर दिया सत्र का राजनीतिक एजेंडा
मानसून सत्र के पहले दिन की घटनाओं से इतना स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में विधानसभा में केवल सरकारी विधेयकों और औपचारिक कार्यवाही पर चर्चा नहीं होगी। राष्ट्रगीत विवाद, बेरोजगारी और चुनावी वादे जैसे मुद्दे सदन में सरकार और विपक्ष के बीच बड़े टकराव का कारण बन सकते हैं।
शुक्रवार का घटनाक्रम इस बात का संकेत भी है कि मानसून सत्र की शुरुआत से ही दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने के मूड में हैं। अब शनिवार सुबह 11 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होगी, तो सबकी नजर इस बात पर होगी कि क्या सदन शांतिपूर्वक चलेगा या पहले दिन का हंगामा आगे भी जारी रहेगा।



