➤ आरएस बाली ने विधानसभा में ज्ञान चंद, विजेंद्र सिंह और रामचंद भाटिया को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
➤ रामचंद भाटिया के तीन बार नगरोटा बगवां विधायक रहते किए विकास कार्यों और पैदल गांवों तक पहुंचने के संघर्ष को किया याद
➤ बाली बोले- नगरोटा बगवां, कांगड़ा और हिमाचल लंबे समय तक इन तीनों नेताओं की जनसेवा और योगदान को याद रखेगा
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में दिवंगत पूर्व जनप्रतिनिधियों ज्ञान चंद, विजेंद्र सिंह और रामचंद भाटिया को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से प्रस्तुत शोक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम एवं नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली ने तीनों विभूतियों के राजनीतिक जीवन, जनसेवा और समाज के प्रति योगदान को याद किया। बाली ने खास तौर पर पूर्व नगरोटा बगवां विधायक रामचंद भाटिया के साथ अपने परिवार के पुराने संबंधों और उनके लंबे सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनुभव सदन में साझा किए।
बाली ने कहा कि तीनों नेताओं ने हिमाचल प्रदेश की सेवा में लंबा समय बिताया और अपने-अपने क्षेत्रों की आवाज को मजबूती से सदन तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि ज्ञान चंद वर्ष 1977 में विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे और उन्होंने कांगड़ा जिले की आवाज को लगातार उठाया। उनका नेतृत्व सरल और साफ-सुथरा रहा। बाली ने कहा कि जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने और लोगों के लिए काम करने के कारण ज्ञान चंद का योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।
ज्ञान चंद और विजेंद्र सिंह के योगदान को किया याद
आरएस बाली ने कहा कि विजेंद्र सिंह बेहद नेक और संवेदनशील इंसान थे। उन्होंने लंबे समय तक प्रदेश की सेवा की और जनकल्याण के लिए काम किया। बाली ने कहा कि उनके परिवार का ज्ञान चंद और विजेंद्र सिंह दोनों के परिवारों के साथ व्यक्तिगत संबंध भी रहा है। ऐसे में इन दोनों नेताओं के निधन की पीड़ा उनके लिए व्यक्तिगत भी है।
उन्होंने कहा कि सदन में कई सदस्यों ने इन नेताओं से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं, जिनसे उनकी शख्सियत और जनसेवा के प्रति समर्पण का पता चलता है। बाली ने कहा कि राजनीति में सक्रिय रहते हुए इन नेताओं ने केवल राजनीतिक भूमिका नहीं निभाई, बल्कि समाज और प्रदेश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी पूरी गंभीरता से निभाया।
रामचंद भाटिया को याद करते हुए भावुक हुए आरएस बाली
रामचंद भाटिया का जिक्र करते हुए आरएस बाली भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के लिए रामचंद भाटिया का निधन एक बड़ी क्षति है। भाटिया तीन बार नगरोटा बगवां से विधायक रहे और उन्होंने विधानसभा में क्षेत्र के विकास तथा स्थानीय समस्याओं को मजबूती से उठाया।
बाली ने कहा कि रामचंद भाटिया ने उस दौर में राजनीति की, जब जनप्रतिनिधि के लिए लोगों तक पहुंचना आज की तुलना में बेहद कठिन था। उस समय गांवों तक सड़कें नहीं थीं। कई क्षेत्रों में स्कूलों की स्थिति भी आज जैसी नहीं थी। दूरदराज के गांवों तक पहुंचने के लिए नेताओं और जनप्रतिनिधियों को घंटों पैदल चलना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि रामचंद भाटिया ऐसे जनप्रतिनिधि थे, जो बस जहां तक पहुंच सकती थी, वहां तक बस से जाते और उसके बाद पैदल गांवों की ओर निकल पड़ते थे। कई बार दुर्गम इलाकों में एक दिन रुकना पड़ता था। लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याएं सुनना और उनके काम करवाने के लिए प्रयास करना उनके राजनीतिक जीवन की खास पहचान रही।
गांवों में आज भी सुनने को मिलती है भाटिया की पैदल यात्राओं की कहानी
आरएस बाली ने कहा कि वह जब आज भी नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के गांवों में जाते हैं तो कई जगह लोगों से रामचंद भाटिया की पुरानी यात्राओं और उनके कामों की बातें सुनने को मिलती हैं। लोग बताते हैं कि जिन रास्तों पर आज वाहन आसानी से पहुंच जाते हैं, वहां कभी रामचंद भाटिया पैदल आया करते थे।
बाली ने कहा कि जिन दुर्गम इलाकों में उस समय सड़कें नहीं थीं, वहां पहुंचकर लोगों के बीच रहना और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करना आसान नहीं था। इसके बावजूद भाटिया ने जनसेवा का रास्ता नहीं छोड़ा। यही कारण है कि उनके निधन के बाद भी क्षेत्र के लोगों के मन में उनके प्रति सम्मान और अपनापन दिखाई देता है।
1998 के चुनाव और परिवार के रिश्ते का भी किया जिक्र
आरएस बाली ने रामचंद भाटिया के साथ अपने परिवार के पुराने रिश्ते का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता का रामचंद भाटिया के साथ चुनावी मुकाबला रहा था और वर्ष 1998 में उनके पिता विधानसभा पहुंचे थे। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद दोनों परिवारों के बीच संबंध मधुर रहे।
बाली ने कहा कि चुनाव के बाद उनके पिता सबसे पहले रामचंद भाटिया से मिलने गए थे। उस मुलाकात में उन्होंने हार-जीत को सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया मानते हुए भाटिया के क्षेत्र के लिए किए गए कामों की सराहना की थी। दोनों के बीच नगरोटा बगवां के विकास को लेकर बातचीत होती रही और क्षेत्र को आगे ले जाने के लिए किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने की भावना बनी रही।
बीमारी के दौरान परिवार के संपर्क में रहे बाली
आरएस बाली ने रामचंद भाटिया की बीमारी के दौरान उनके परिवार के साथ हुए संवाद को भी सदन में साझा किया। उन्होंने बताया कि भाटिया के बेटे विवेक भाटिया से कई बार उनकी बातचीत होती रही। बीमारी के दौरान उन्होंने परिवार के सदस्यों के माध्यम से भी लगातार उनका हाल जाना।
बाली ने बताया कि जब वह अस्पताल में रामचंद भाटिया को देखने पहुंचे तो उनकी पत्नी बेहद व्यथित थीं। उन्होंने बाली से यही पूछा कि क्या रामचंद भाटिया ठीक हो जाएंगे। बाली ने कहा कि परिवार के लिए वह बेहद कठिन समय था। उन्होंने परिवार को हिम्मत देते हुए कहा था कि रामचंद भाटिया मजबूत इंसान हैं और आखिरी समय तक मजबूती से लड़ेंगे।
उन्होंने बताया कि उपचार के दौरान डॉक्टरों के साथ भी कई बार बातचीत हुई। टांडा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों और अस्पताल के डॉक्टरों से इलाज को लेकर जानकारी ली गई। बाली ने कहा कि इतने मजबूत व्यक्तित्व को गंभीर अवस्था में देखना उनके लिए बेहद पीड़ादायक था।
अंतिम विदाई में भी दिखा लोगों का सम्मान
रामचंद भाटिया के अंतिम संस्कार का जिक्र करते हुए आरएस बाली ने कहा कि वहां बड़ी संख्या में लोग और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पहुंचे थे। उस दौरान भी लोगों के बीच भाटिया की जनसेवा और उनके व्यवहार की चर्चा होती रही।
बाली ने कहा कि लोगों के साथ सम्मान और आत्मीयता से पेश आना, उनके काम करना और कठिन परिस्थितियों में भी उनके बीच मौजूद रहना रामचंद भाटिया के व्यक्तित्व की विशेषता थी। यही वजह है कि उनके निधन के बाद भी लोग उनके कार्यों को याद कर रहे हैं।
नगरोटा बगवां की राजनीतिक विरासत में हमेशा याद रहेंगे भाटिया
आरएस बाली ने कहा कि रामचंद भाटिया ने तीन बार नगरोटा बगवां की जनता का प्रतिनिधित्व किया और क्षेत्र के विकास के लिए लगातार आवाज उठाई। उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सरल छवि, साफ-सुथरा व्यवहार, संघर्षशीलता और जनसेवा की भावना रही।
उन्होंने कहा कि नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के लोग उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखेंगे। कांगड़ा जिला और पूरा हिमाचल प्रदेश भी उनके सार्वजनिक जीवन और जनसेवा को सम्मान के साथ स्मरण करेगा।
बाली ने कहा कि ज्ञान चंद, विजेंद्र सिंह और रामचंद भाटिया के रूप में हिमाचल ने तीन ऐसी विभूतियों को खोया है, जिन्होंने अलग-अलग समय में प्रदेश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने तीनों नेताओं के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी जनसेवा की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
सदन के माध्यम से आरएस बाली ने तीनों दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि इन नेताओं का योगदान केवल उनके राजनीतिक कार्यकाल तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने व्यवहार, संघर्ष और सेवाभाव से लोगों के बीच ऐसी जगह बनाई, जिसे उनके जाने के बाद भी भुलाया नहीं जा सकता।



