➤ रणधीर शर्मा ने भाजपा की चार्जशीट में 32 कांग्रेस नेताओं के नाम होने का दावा किया
➤ हिमकेयर के लंबित भुगतान और स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों को लेकर सरकार को घेरा
➤ बोले- आरोपों की जांच हो रही है तो सीएम, डिप्टी सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष से जुड़े मामलों की भी जांच हो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाओं और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सियासी माहौल गरमा गया। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने नियम 130 के तहत स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर चर्चा के दौरान प्रदेश सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की चार्जशीट में 32 कांग्रेस नेताओं के नाम शामिल हैं। रणधीर शर्मा ने कहा कि यदि सरकार भाजपा की ओर से तैयार की गई चार्जशीट में लगाए गए आरोपों की जांच करवा रही है, तो उसमें नामजद कांग्रेस नेताओं से जुड़े मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि चार्जशीट में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख है। ऐसे में जांच की प्रक्रिया किसी एक पक्ष तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनकी सत्यता संबंधित जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सरकार को घेरा
विधानसभा में चर्चा के दौरान रणधीर शर्मा ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने हिमकेयर योजना के लंबित भुगतान, स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े पदों और केंद्र से मिली धनराशि के उपयोग को लेकर सवाल उठाए।
रणधीर शर्मा ने दावा किया कि 15वें वित्त आयोग से हिमाचल को मिले 521 करोड़ रुपये में से सरकार आधी राशि भी खर्च नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 15 क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्वीकृत होने के बावजूद इनके निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
भाजपा विधायक ने सरकार से पूछा कि जब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी धनराशि उपलब्ध है, तो उसका समय पर उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है।
हिमकेयर के करोड़ों रुपये के भुगतान लंबित होने का दावा
रणधीर शर्मा ने हिमकेयर योजना के तहत विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लंबित भुगतान का मुद्दा भी विधानसभा में उठाया। उन्होंने दावा किया कि आईजीएमसी का करीब 80 करोड़ रुपये, टांडा मेडिकल कॉलेज का 72 करोड़ रुपये, एम्स का 60 करोड़ रुपये और पीजीआई का करीब 20 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिलने का असर स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों को उपलब्ध होने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है। सरकार को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाते हुए लंबित भुगतान का समाधान करना चाहिए।
खाली पदों को लेकर भी सरकार पर निशाना
भाजपा विधायक ने स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रिक्तियों को भरने के बजाय पुरुष और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता संवर्ग को समाप्त किया जा रहा है।
उन्होंने नयना देवी आदर्श संस्थान में रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ अपने विधानसभा क्षेत्र में डॉक्टरों के 13 खाली पदों को जल्द भरने की मांग भी उठाई।
रणधीर शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवा में कर्मचारियों और चिकित्सकों की कमी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होना जरूरी है।
राष्ट्रगान के मुद्दे पर विपिन सिंह परमार ने भी सरकार को घेरा
विधानसभा परिसर में भाजपा विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने भी मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर निशाना साधा। उन्होंने राष्ट्रगान से जुड़े विवाद को लेकर मुख्यमंत्री से माफी मांगने की मांग की।
परमार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने सदन और प्रदेश की जनता के सामने गलत तथ्य प्रस्तुत किए। उनका कहना था कि वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से विपक्ष पर लगाए गए आरोपों को लेकर माफी मांगने की मांग की।
आरोपों पर जांच से ही सामने आएगी वास्तविकता
विधानसभा में रणधीर शर्मा के बयान के बाद एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं। भाजपा जहां चार्जशीट, हिमकेयर भुगतान और स्वास्थ्य विभाग की रिक्तियों को लेकर सरकार को घेर रही है, वहीं सरकार का पक्ष इन आरोपों और दावों पर अलग हो सकता है।
राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। चार्जशीट में नाम होने या किसी मामले में आरोप लगाए जाने मात्र से किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि नहीं होती। संबंधित मामलों में जांच और आधिकारिक निष्कर्ष के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।



