➤ पंजाब में 55 और हरियाणा में 152 सैंपल तय मानकों पर फेल
➤ हिमाचल में 92, जम्मू-कश्मीर में 58 और राजस्थान में 111 सैंपल मानक से अधिक
➤ लंबे समय तक कीटनाशक सेवन से कैंसर, हार्मोन और लिवर-किडनी की बीमारियों का खतरा
चंडीगढ़। फल और सब्जियां सेहत के लिए जरूरी मानी जाती हैं, लेकिन कीटनाशकों के अधिक अवशेष अब चिंता बढ़ाने वाले हैं। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट में पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में फलों-सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों में कीटनाशकों के अवशेष तय सीमा से अधिक पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 55 और हरियाणा में 152 सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
वर्ष 2023 से 2026 के बीच लिए गए नमूनों की जांच के बाद यह स्थिति सामने आई है। इसी अवधि में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान से लिए गए नमूनों में भी तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए गए हैं। लंबे समय तक अधिक मात्रा में कीटनाशक अवशेष वाले खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है और इससे कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
40 प्रयोगशालाओं में हुई नमूनों की जांच
रिपोर्ट के अनुसार सब्जियों, फलों, मसालों, अनाज, दालों और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने अलग-अलग स्थानों से लिए गए। इनमें खुदरा दुकानें, थोक बाजार, सहकारी समितियां, कृषि उपज मंडी यानी एपीएमसी बाजार, सीधे खेतों और जैविक उत्पाद बेचने वाले केंद्र शामिल रहे।
इन नमूनों को 40 प्रयोगशालाओं के माध्यम से एकत्र किया गया और इनमें कीटनाशकों के अवशेषों की संभावित मौजूदगी की जांच की गई। जांच का उद्देश्य खाद्य पदार्थों में मौजूद कीटनाशक अवशेषों की स्थिति का पता लगाना था।
रिपोर्ट में वर्ष 2023 से 2026 के दौरान अलग-अलग राज्यों से लिए गए नमूनों के आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों में कई नमूने निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए जाने के कारण मानकों पर खरे नहीं उतर सके।
पंजाब में 6580 में से 55 सैंपल फेल
पंजाब में वर्ष 2023 से 2026 के बीच कुल 6580 सैंपल लिए गए। इनमें से 55 सैंपलों में कीटनाशकों के अवशेष तय मात्रा से अधिक पाए गए।
हरियाणा में इसी अवधि के दौरान कुल 2371 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 152 नमूनों में निर्धारित सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए गए।
आंकड़ों से साफ है कि दोनों राज्यों में बड़ी संख्या में खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के दायरे में लाए गए और इनमें कुछ नमूनों में कीटनाशक अवशेष निर्धारित मानकों से अधिक मिले।
हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में भी सामने आई स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 5765 सैंपल लिए गए, जिनमें 92 नमूनों में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए।
वहीं जम्मू-कश्मीर में 1489 नमूनों की जांच की गई और इनमें 58 नमूनों में तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष मिले।
राजस्थान में 3564 सैंपल लिए गए। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार यहां 111 नमूनों में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए हैं।
इस तरह पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान में लिए गए नमूनों की जांच के दौरान तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष वाले नमूने सामने आए हैं।
लंबे समय तक सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा
फलों, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों में तय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेषों का लंबे समय तक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट में दर्द, उल्टी, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसके अलावा लंबे समय तक शरीर में कीटनाशकों के पहुंचने से कैंसर, हार्मोन में गड़बड़ी और लिवर-किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी हो सकता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर कीटनाशकों के अधिक संपर्क का बुरा असर अपेक्षाकृत जल्दी होने की आशंका जताई गई है।
इस वजह से खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों की मात्रा और उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जांच और निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किन कीटनाशकों का इस्तेमाल हो रहा है, इसकी जांच जरूरी
पीजीआई के प्रोफेसर रवींद्र खैवाल ने कहा कि फल-सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष अधिक मात्रा में सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जांच करने की जरूरत है कि किस तरह के कीटनाशक इन खाद्य पदार्थों में पाए जा रहे हैं, ताकि इनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों का पता लगाया जा सके।
उनके अनुसार केवल कीटनाशक अवशेषों की मौजूदगी सामने आना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाना जरूरी है कि खाद्य पदार्थों में कौन-कौन से कीटनाशक मौजूद हैं और उनका मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट में सामने आए आंकड़ों ने फल-सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। अलग-अलग राज्यों में लिए गए नमूनों की जांच के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक अवशेष वाले नमूने मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो गया है।



